- ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो केवल वयस्कों को ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों को भी प्रभावित कर सकती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मस्तिष्क की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और एक जगह इकट्ठा होकर गांठ (Tumor) का रूप ले लेती हैं। यह गांठ जैसे-जैसे बड़ी होती है, मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली में रुकावट डालने लगती है। ब्रेन ट्यूमर जानलेवा भी हो सकता है, इसलिए इसका समय रहते पता लगाना और इलाज शुरू करना बेहद जरूरी होता है।
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- बीते कुछ वर्षों में बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग उम्र के बच्चों में मृत्यु दर का एक अहम कारण ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन कैंसर जैसी बीमारियां बनती जा रही हैं।
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- ब्रेन ट्यूमर कितना खतरनाक है?
- डॉ. नितिन डांगे, जो कि ग्लेनेगल्स हॉस्पिटल, परेल मुंबई में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख हैं, बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर के कुछ प्रकार कैंसर में बदल सकते हैं, जबकि कुछ गैर-कैंसरजन्य भी हो सकते हैं। बावजूद इसके, ब्रेन ट्यूमर की किसी भी स्थिति में त्वरित इलाज जरूरी होता है, क्योंकि मस्तिष्क शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा है और इस पर ज़रा सी गड़बड़ी भी घातक हो सकती है।
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- बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती संकेत – नजरअंदाज ना करें ये 6 लक्षण
- ब्रेन ट्यूमर जितनी जल्दी पकड़ा जाए, उतनी ही ज्यादा बचने की संभावना होती है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य में किसी भी असामान्यता पर तुरंत ध्यान दें।
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- 1. बार-बार या सुबह के समय तेज सिरदर्द
- बच्चों में लगातार सिरदर्द या सुबह उठते ही तेज दर्द की शिकायत को हल्के में न लें। अगर सिरदर्द के कारण बच्चा उठने में परेशानी महसूस करता है या कुछ घंटे बाद दर्द अपने-आप ठीक हो जाता है, तो यह ब्रेन ट्यूमर का एक संभावित संकेत हो सकता है।
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- 2. उल्टी और मतली की बार-बार समस्या
- बिना किसी ठोस कारण के उल्टी आना या जी मिचलाना (Nausea), खासकर जब यह नियमित रूप से हो, तो इसे आम पेट खराबी समझकर अनदेखा न करें। यह संकेत मस्तिष्क में दवाब बढ़ने की ओर इशारा कर सकता है, जो ब्रेन ट्यूमर के कारण होता है।
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- 3. नजर की समस्याएं
- यदि बच्चा दोहरी चीज़ें देखता है, उसे नज़दीक या दूर की चीज़ें साफ नहीं दिख रही हैं, या देखने में किसी भी तरह की परेशानी है, तो यह मस्तिष्क में बढ़ते दबाव का लक्षण हो सकता है। ब्रेन ट्यूमर आंखों की ऑप्टिक नसों पर असर डाल सकता है, जिससे दृष्टि में बदलाव आता है।
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- 4. चलने या शरीर का संतुलन बिगड़ना
- बच्चा चलते समय लड़खड़ाता है, गिर जाता है या उसका संतुलन सही नहीं बन पा रहा, तो यह ब्रेन के उस हिस्से में ट्यूमर की उपस्थिति का संकेत हो सकता है, जो संतुलन को नियंत्रित करता है।
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- 5. बोलने या समझने में दिक्कत
- यदि बच्चा पहले स्पष्ट बोलता था लेकिन अब बातचीत में परेशानी हो रही है या वह अपनी बात सही ढंग से व्यक्त नहीं कर पा रहा है, तो यह संकेत भी ब्रेन ट्यूमर से जुड़ा हो सकता है।
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- 6. चिड़चिड़ापन और व्यवहार में बदलाव
- बच्चों में अचानक चिड़चिड़ापन, गुस्सा या असामान्य व्यवहार, बिना किसी स्पष्ट कारण के दिखे तो इसे केवल मनोदशा का उतार-चढ़ाव मानने की भूल न करें। मस्तिष्क में ट्यूमर का असर मानसिक और भावनात्मक व्यवहार पर भी पड़ता है।
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- कब डॉक्टर से संपर्क करें?
- यदि ऊपर बताए गए लक्षणों में से एक या अधिक लगातार दिखते हैं, तो समय गंवाए बिना किसी न्यूरोलॉजिस्ट या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। MRI या CT स्कैन जैसी तकनीकों से ट्यूमर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है और त्वरित इलाज शुरू किया जा सकता है।