Zomato: ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ज़ोमैटो ने भारतीय शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 23 दिसंबर 2024 को, ज़ोमैटो बीएसई सेंसेक्स में शामिल होने वाली पहली नई पीढ़ी की कंपनी बन गई, जिसने जेएसडब्ल्यू स्टील की जगह ली। इस उपलब्धि के साथ, ज़ोमैटो का सेंसेक्स में वेटेज 2.77% हो गया है, जिससे वह 30 कंपनियों की सूची में 12वें स्थान पर पहुंच गई है। इसने हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स और नेस्ले जैसी उपभोक्ता दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।
सेंसेक्स में शामिल होने का महत्व
सेंसेक्स में शामिल होना किसी भी कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होता है, क्योंकि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत और स्थिर कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। ज़ोमैटो की यह उपलब्धि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है, जो $5.2 ट्रिलियन के सूचीबद्ध इकोसिस्टम में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
वेटेज निर्धारण के कारक
ज़ोमैटो का "प्रमोटर-रहित" (promoter-less) स्टेटस और हाल ही में किए गए ₹8,500 करोड़ के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) ने इसके पब्लिक फ्लोट को बढ़ाया है, जो वेटेज की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में, ज़ोमैटो का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹2.64 ट्रिलियन है, जिससे यह भारत की 28वीं सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है।
निवेशकों पर प्रभाव
सेंसेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹2 ट्रिलियन से अधिक है। वर्तमान में, घरेलू म्यूचुअल फंड्स 21 पैसिव स्कीम्स ऑफर करते हैं, जिनका आधार सेंसेक्स है। ज़ोमैटो के शामिल होने से इन फंड्स में निवेश बढ़ सकता है, जिससे कंपनी के शेयरों की मांग में वृद्धि हो सकती है।
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