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Shyam Benegal Passes Away: भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित निर्देशक श्याम बेनेगल का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनकी बेटी पिया बेनेगल ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। बेनेगल पिछले कुछ वर्षों से क्रॉनिक किडनी रोग से पीड़ित थे, जो उनकी मृत्यु का कारण बना। 

समानांतर सिनेमा के अग्रदूत

श्याम बेनेगल को भारतीय समानांतर सिनेमा आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है। उनकी फिल्मों ने 1970 और 1980 के दशकों में मुख्यधारा के सिनेमा से हटकर सामाजिक और यथार्थवादी विषयों को प्रस्तुत किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'अंकुर', 'भूमिका', 'मंथन' और 'निशांत' शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी।

प्रमुख कृतियाँ और उपलब्धियाँ

अंकुर (1974): यह बेनेगल की पहली फीचर फिल्म थी, जिसने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता और शबाना आज़मी को फिल्म उद्योग में स्थापित किया।

निशांत (1975): इस फिल्म ने सामाजिक अन्याय और उत्पीड़न के मुद्दों को उठाया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा प्राप्त की।

मंथन (1976): यह फिल्म भारत के दुग्ध क्रांति पर आधारित थी और इसे किसानों के सहयोग से निर्मित किया गया था। यह फिल्म 1976 के ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी।

भूमिका (1977): यह फिल्म एक अभिनेत्री की जीवनी पर आधारित थी और इसे सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

स्वास्बेनेगल ने 14 दिसंबर को अपना 90वां जन्मदिन मनाया था। हालांकि, वे पिछले कुछ वर्षों से क्रॉनिक किडनी रोग से जूझ रहे थे, जो अंततः उनकी मृत्यु का कारण बना। उनकी बेटी पिया बेनेगल ने बताया कि वे मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल में शाम 6:38 बजे अंतिम सांस ली। 

सिनेमा में योगदान और विरासत

श्याम बेनेगल का सिनेमा में योगदान अतुलनीय है। उन्होंने भारतीय सिनेमा को यथार्थवाद की दिशा में अग्रसर किया और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनकी फिल्मों ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशंसा प्राप्त की। उनकी अंतिम निर्देशित फिल्म 'मुझिब: द मेकिंग ऑफ ए नेशन' 2023 में प्रदर्शित हुई, जो बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुझिबुर रहमान पर आधारित थी। श्याम बेनेगल के निधन पर फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। उनकी फिल्मों और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए सामाजिक संदेशों के माध्यम से वे सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

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