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Vinod Kambli, Sachin Tendulkar, Sanjay Manjrekar, cricket friendship: क्रिकेट की दुनिया में दोस्ती और प्रतिस्पर्धा का एक खूबसूरत उदाहरण सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली की जोड़ी है। दोनों ही खिलाड़ी मुंबई से आते हैं और 1980-90 के दशक में भारतीय क्रिकेट के प्रमुख चेहरे बने। लेकिन जहां सचिन ने अपनी मेहनत और अनुशासन से क्रिकेट में अमरता हासिल की, वहीं कांबली अपने संघर्ष और विवादों के कारण क्रिकेट से दूर हो गए।

संजय मांजरेकर का खुलासा

हाल ही में संजय मांजरेकर ने विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर के रिश्ते से जुड़े कुछ अनसुने किस्से शेयर किए। उन्होंने बताया कि 1992 वर्ल्ड कप के शुरुआती मैचों में कांबली को प्लेइंग 11 में मौका नहीं मिला, जिससे वह निराश थे। मांजरेकर ने कहा कि कांबली अक्सर सचिन और अन्य खिलाड़ियों की कमियां निकालते थे।

जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच: सचिन और मांजरेकर ने शानदार साझेदारी की, लेकिन कांबली ने कहा, "हमने जल्दी मैच खत्म क्यों नहीं किया?" उन्होंने सचिन से कहा, "जॉन ट्रैकर्स जैसे साधारण स्पिनर की गेंदों को तुम ग्राउंड के बाहर क्यों नहीं मार रहे थे?" कांबली को पाकिस्तान के खिलाफ सिडनी में खेलने का मौका मिला। उन्होंने धीमी बल्लेबाजी की, जिससे सचिन और मांजरेकर ने उनसे सवाल किया। कांबली ने जवाब दिया, "वो लोग बहुत टाइट बॉलिंग कर रहे थे।"

कांबली का करियर 

विनोद कांबली ने भारत के लिए 104 वनडे और 17 टेस्ट खेले, लेकिन उनकी काबिलियत के अनुसार उनका करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। उनकी डिसिप्लिन की कमी और गलत निर्णय उनके करियर के लिए बाधा बने। इसके विपरीत, सचिन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 100 शतक लगाए और 463 वनडे और 200 टेस्ट खेले। आज कांबली का जीवन संघर्ष से भरा है। उनकी हेल्थ और फाइनेंशियल स्थिति ठीक नहीं है। सोशल मीडिया पर उनकी कुछ वीडियो वायरल हुईं, जिनमें वह कमजोर नजर आए।
हाल ही में एक वीडियो में सचिन तेंदुलकर को कांबली का हालचाल लेते देखा गया। यह दर्शाता है कि उनकी दोस्ती आज भी बरकरार है।

कांबली की कहानी से क्या सीखें?

विनोद कांबली की कहानी हमें सिखाती है कि किसी भी सफलता के पीछे अनुशासन और मेहनत का होना बेहद जरूरी है। अगर कांबली ने सचिन की तरह अपने करियर पर ध्यान दिया होता, तो आज उनकी गिनती भी क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में होती।

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