Ravichandran Ashwin Retirement: रविचंद्रन अश्विन का नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। टेस्ट क्रिकेट में 537 विकेट, 37 बार पांच विकेट हॉल, और बल्ले से छह शतक-अश्विन ने भारतीय क्रिकेट को अनगिनत ऐतिहासिक पल दिए हैं। 11 प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड्स ने दिखाया कि वे न सिर्फ गेंदबाज बल्कि एक ऑलराउंडर भी थे। 2023 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन टीम के लिए मील का पत्थर था। लेकिन इतनी अद्भुत उपलब्धियों के बाद, उनका संन्यास लेना हर किसी के लिए चौंकाने वाला रहा।
रिटायरमेंट का पहला कारण: लगातार इंजरी का असर
2023 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान, अश्विन को घुटने की चोट (नी इंजरी) का सामना करना पड़ा था। यह चोट उनकी गेंदबाजी पर गहरा प्रभाव डाल रही थी। अश्विन के करीबियों का कहना है कि इसी समय उन्होंने रिटायरमेंट का विचार करना शुरू कर दिया था।
दूसरा कारण: टीम से बाहर होने की निराशा
ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद, उन्हें अगले मैच में टीम से ड्रॉप कर दिया गया। यह निर्णय अश्विन को गहरी निराशा में डाल गया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कप्तान रोहित शर्मा और टीम मैनेजमेंट को स्पष्ट कर दिया कि अगर टीम उन्हें नहीं चाहती, तो रिटायर होना ही सही रहेगा।
फैमिली के साथ शेयर किया फैसला
18 दिसंबर 2024 को, अश्विन ने अपने पिता को फोन पर बताया कि एडिलेड टेस्ट उनका आखिरी इंटरनेशनल मैच होगा। उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को भी यह निर्णय समझाया। यह उनके लिए बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक पल था। अश्विन के संन्यास पर क्रिकेट जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। सहवाग और गंभीर जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने इसे टीम मैनेजमेंट की विफलता बताया। वहीं, कुछ ने इसे अश्विन की प्राइड और डिग्निटी से लिया गया सही निर्णय कहा। रविचंद्रन अश्विन का करियर केवल रिकॉर्ड और आंकड़ों तक सीमित नहीं है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को मेहनत, अनुशासन और दृढ़ता का पाठ पढ़ाया। उनकी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी की विविधता और दबाव में परफॉर्म करने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
क्या अश्विन का फैसला सही था?
यह सवाल हर फैन के मन में है। क्या अश्विन को थोड़ा और खेलने का मौका मिलना चाहिए था? या फिर उन्होंने सही समय पर संन्यास लिया? यह कहना मुश्किल है, लेकिन जो भी हो, अश्विन के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
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