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  • Tsunami Wave: ‘सुनामी’ शब्द की जड़ें जापानी भाषा में हैं, जहां ‘Tsu’ का अर्थ होता है ‘बंदरगाह’ और ‘Nami’ का अर्थ होता है ‘लहर’। इस प्रकार, सुनामी का मतलब होता है ‘बंदरगाह की लहर’। लेकिन असल में ये साधारण लहरें नहीं, बल्कि समुद्र के भीतर उत्पन्न होने वाली विशाल ऊर्जा की धाराएं होती हैं, जो तटीय इलाकों में भयंकर तबाही ला सकती हैं। भारत की आपदा प्रबंधन समिति के अनुसार, सुनामी ऐसी समुद्री तरंगों की श्रृंखला होती है जो भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, या भूस्खलन जैसी घटनाओं से उत्पन्न होती हैं।
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  • सुनामी के मुख्य कारण
  • 1. भूकंप
  • सुनामी उत्पन्न होने का सबसे सामान्य और खतरनाक कारण समुद्री भूकंप है। जब समुद्र के तल पर 7.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो पृथ्वी की प्लेटें खिसकती हैं और जल में अचानक उर्ध्वाधर हलचल होती है। यह असंतुलन ही सुनामी लहरों को जन्म देता है, जो भूकंप के केंद्र से गोलाकार रूप में चारों तरफ फैलती हैं। हालांकि, हर समुद्री भूकंप सुनामी नहीं लाता — केवल वही जिनमें जलस्तर में ऊर्ध्वाधर विस्थापन होता है।
  • उदाहरण:
    2004 में हिंद महासागर में आए भयंकर भूकंप के कारण एक विशाल सुनामी उत्पन्न हुई, जिसने लाखों लोगों की जान ले ली।
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  • 2. भूस्खलन और हिमस्खलन
  • कभी-कभी समुद्र के नीचे चट्टानों या बर्फ के बड़े हिस्सों के खिसकने से भी सुनामी उत्पन्न होती है। जैसे 1980 के दशक में फ्रांस के एक तटीय क्षेत्र में हवाई अड्डा निर्माण के दौरान हुए जलमग्न भूस्खलन से मिस्र के तट पर विनाशकारी सुनामी देखी गई थी।
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  • 3. ज्वालामुखीय विस्फोट
  • अगर कोई समुद्री ज्वालामुखी फटता है, तो यह भारी मात्रा में जल को विस्थापित कर देता है, जिससे सुनामी की लहरें बनती हैं।
    उदाहरण:
    1883 में इंडोनेशिया में क्राकाताओ ज्वालामुखी फटने से 40 मीटर तक ऊंची लहरें उठी थीं, जो विनाश का पर्याय बन गई थीं।
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  • सुनामी का फैलाव और गतिकी
  • सुनामी अपनी उत्पत्ति के बिंदु से चारों ओर एक जैसी गति से फैलती है, जैसे शांत जल में कोई पत्थर गिराने से लहरें फैलती हैं। खुले समुद्र में इनकी गति 500 से 800 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। लेकिन इनकी ऊंचाई वहां बहुत कम—लगभग 1 मीटर—होती है, जिससे इन्हें पहचाना मुश्किल होता है।
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  • जैसे ही ये तरंगें उथले तटीय जल में प्रवेश करती हैं, इनकी गति घटती है, लेकिन ऊंचाई कई गुना बढ़ जाती है। तट पर पहुंचते-पहुंचते ये लहरें 30 से 40 मीटर तक ऊंची हो सकती हैं। यही वह क्षण होता है जब सुनामी तबाही मचाती है।
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  • दुनियाभर में सुनामी का वितरण
  • हालांकि सुनामी किसी भी महासागर में उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन प्रशांत महासागर और उसके आसपास के इलाके सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। कारण यह है कि प्रशांत प्लेट अत्यंत अस्थिर है। इसके किनारों पर प्लेटों का टकराव और दूर हटना लगातार चलता रहता है, जिससे यहां नियमित रूप से भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
  • जापान: रिकॉर्ड के अनुसार, जापान के तटीय क्षेत्रों पर अब तक 150 से ज्यादा सुनामियों का असर पड़ा है।
  • इंडोनेशिया: 31 बार सुनामी प्रभावित कर चुका है।
  • प्रशांत महासागर: यहां हर साल औसतन 2 सुनामियां आती हैं।
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  • प्रशांत महासागर का "अग्नि वलय" — जिसमें फिजी, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस, जापान, रूस, अमेरिका और दक्षिण अमेरिका शामिल हैं — दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है। हालांकि भारत इस वलय के बाहर है, लेकिन 2004 की सुनामी ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत भी अछूता नहीं है।
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  • सुनामी के प्रभाव: 2004 की सुनामी के उदाहरण से समझें
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  • 1. जीवन और संपत्ति की भारी हानि
  • 2004 की सुनामी में 11 देशों में करीब 2.8 लाख लोग मारे गए और 10 लाख से अधिक बेघर हो गए। अरबों की संपत्ति नष्ट हो गई।
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  • 2. भौगोलिक संरचना में बदलाव
  • सुमात्रा के निकट कई द्वीप पूर्णतः या आंशिक रूप से नष्ट हो गए। भारत का “इंदिरा पॉइंट” भी समुद्र में समा गया। इस घटना से 1200 किमी लंबा और 200 किमी चौड़ा भूकंपीय भ्रंश बना।
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  • 3. पृथ्वी की गति में परिवर्तन
  • भूकंप के कारण पृथ्वी की घूर्णन गति 3 माइक्रोसेकंड तेज हो गई और इसके ध्रुवीय अक्ष में 2.5 सेमी का विस्थापन दर्ज किया गया।
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  • 4. भूमि की उर्वरता में गिरावट
  • निम्न तटीय क्षेत्रों में समुद्री नमक का जमाव हुआ जिससे भूमि की उर्वरता घट गई। तमिलनाडु और श्रीलंका जैसे क्षेत्रों में खेती योग्य भूमि को भारी नुकसान पहुंचा।
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  • 5. समुद्री पारिस्थितिकी पर असर
  • अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 45% प्रवाल भित्तियां नष्ट हो गईं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनकी पूरी पुनर्स्थापना में 700-800 साल लग सकते हैं। साथ ही, मत्स्य उत्पादन में भी भारी गिरावट आई।