img

Treasure NFT Real or Fake: रवि (बदला हुआ नाम) एक महत्वाकांक्षी युवक था, जो अपनी फाइनेंशियल फ्रीडम के सपने देखता था। एक दिन, सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए उसने "ट्रेजर एनएफटी" के बारे में एक वीडियो देखा। यह प्लेटफ़ॉर्म एनएफटी खरीदने और बेचने के जरिए आसानी से पैसे कमाने का दावा करता था। इतनी बड़ी कमाई का वादा रवि के लिए काफी आकर्षक था, और उसने इसे और गहराई से समझने का फैसला किया।

रवि को दिखा वर्चुअल मुनाफा

प्लेटफ़ॉर्म की वेबसाइट और यूजर्स की गवाही ने इसे एक शानदार अवसर की तरह दिखाया। दावा था कि आप एनएफटी को कम कीमत पर खरीदकर अधिक कीमत पर बेच सकते हैं और रोज़ाना अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। रवि ने $100 का छोटा निवेश किया। एक हफ्ते के अंदर उसके अकाउंट में $25 का मुनाफा दिखने लगा। उसे लगा कि उसने अपनी आर्थिक समस्या का समाधान पा लिया है।

रिसर्च में क्‍या पता चला?

हालांकि, रवि की उत्सुकता ने उसे गहराई से जांच करने के लिए प्रेरित किया। उसे जल्द ही कुछ अजीब बातें समझ आईं। उसने जिन एनएफटी को "खरीदा", वे किसी भी वैलिड ब्लॉकचेन रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं थे। अन्य एनएफटी प्लेटफ़ॉर्म पर सभी ट्रांजैक्शन सार्वजनिक रूप से देखी जा सकती थीं, लेकिन ट्रेजर एनएफटी के मामले में ऐसा नहीं था। जब उसने कॉन्ट्रैक्ट एड्रेस और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खोजने की कोशिश की, तो उसे कुछ भी नहीं मिला। उसे एहसास हुआ कि प्लेटफ़ॉर्म का "एनएफटी खरीदने और बेचने" का दावा महज एक दिखावा था।

पिरामिड स्कीम का सच आया सामने

जैसे-जैसे रवि ने प्लेटफ़ॉर्म के मॉडल को समझा, उसे असली सच पता चला। ट्रेजर एनएफटी वास्तव में एक पिरामिड स्कीम थी। यहां मुनाफा केवल नए यूजर्स द्वारा जमा किए गए पैसे से दिया जाता था। प्लेटफ़ॉर्म का पूरा मॉडल इस बात पर निर्भर करता था कि नए लोग जुड़ते रहें।

रिसर्च में सामने आईं ये बातें

जेन्युइन ट्रांजैक्शन नहीं: एनएफटी का कोई वास्तविक व्यापार ब्लॉकचेन पर नहीं हो रहा है।
नए लोगों पर निर्भरता: पुराने यूजर्स को मुनाफा तभी मिलता था जब नए लोग जुड़ते थे और पैसे जमा करते हैं।
संभावित बंद होने का खतरा: जैसे ही नए यूजर्स आना बंद होते, पूरा सिस्टम ढह सकता है।

साभार-Nafzz Tech