- राज्य के ग्रामीण इलाकों में अब विकास की बयार केवल सड़कों या बिजली के तारों तक सीमित नहीं रही। अब तकनीक ने गांव की चौपाल तक अपनी पहुंच बना ली है। इसका बेहतरीन उदाहरण है पैक्सों में स्थापित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), जो गांववासियों की दिनचर्या को पहले से कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक बना रहे हैं। किसान हो या छात्र, महिला हो या मजदूर—हर वर्ग अब डिजिटल सेवाओं से सशक्त हो रहा है।
-
- राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक 4,477 पैक्सों का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है। इसके साथ ही कुल 5,987 पैक्सों में से 4,316 में CSC क्रियाशील हो चुके हैं, और इनके माध्यम से अब तक 4.5 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार हो चुका है। ये आंकड़े बताते हैं कि तकनीक और प्रशासनिक पहल का यह मेल किस कदर सफल हो रहा है।
-
- गांव में ही 300+ सेवाएं – अब शहर जाना नहीं जरूरी
- कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से गांववासियों को अब शहर की दौड़-भाग से मुक्ति मिल गई है। ये केंद्र 300 से अधिक सरकारी और गैर-सरकारी सेवाएं प्रदान करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
-
- रेलवे, बस और हवाई जहाज के टिकट बुकिंग
- आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड
- ई-श्रम कार्ड
- आधार कार्ड सेवाएं (जैसे अपडेट, प्रिंट, पंजीकरण)
- पैन कार्ड आवेदन और सुधार
- बिजली बिल भुगतान, बैंकिंग सेवाएं, बीमा और पेंशन योजनाएं
- पहले जहां इन कार्यों के लिए लोगों को घंटों का सफर तय कर शहरों तक जाना पड़ता था, वहीं अब ये सारी सेवाएं गांव के पैक्स कार्यालय में ही उपलब्ध हैं। इससे समय, पैसा और श्रम—तीनों की बचत हो रही है।
-
- राज्य सरकार की भूमिका और सराहना
-
- राज्य के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने पैक्सों में सक्रिय CSC नेटवर्क पर संतोष जताते हुए इसे राज्य के लिए "एक ऐतिहासिक उपलब्धि" करार दिया है। उनका कहना है कि इन केंद्रों ने गांव-गांव तक सुविधाएं पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से न केवल ग्रामीणों की जिंदगी सरल हुई है, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं और डिजिटल दुनिया से जुड़ने का एक मजबूत जरिया मिला है।
-
- बची हुई पैक्सों को जल्द जोड़ने की योजना
-
- हालांकि अब तक 4,316 पैक्सों में CSC चालू हो चुके हैं, लेकिन कुछ पैक्स अब भी इस सुविधा से वंचित हैं। इस संबंध में सहयोग समितियों की निबंधक इनायत खान ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बचे हुए पैक्सों को जल्द से जल्द क्रियाशील किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पैक्सों की CSC आईडी अभी तक पूर्व अध्यक्षों के नाम से है, उन्हें वर्तमान प्रबंधक के नाम से अपडेट करवाया जाए ताकि संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
- इनायत खान ने इसे किसानों और ग्रामीण समाज के लिए "मील का पत्थर" करार देते हुए कहा कि इस तरह की डिजिटल पहुंच ने गांवों को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना दिया है।