पटना: राजधानी पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान को जल्द ही दो अनोखे और खास मेहमान मिलने वाले हैं। अफ्रीका के कांगो के घने जंगलों से एक चिम्पांजी का जोड़ा यहां लाया जाएगा, जिससे पटना जू की जैव विविधता और आकर्षण दोनों में इजाफा होगा। इस बारे में राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने सोमवार को विश्व चिम्पांजी दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में जानकारी दी।
डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि चिम्पांजियों को अफ्रीका से लाने की प्रक्रिया पर कार्य शुरू कर दिया गया है और जल्द ही ये जोड़ा पटना के दर्शकों को देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि चिम्पांजी अफ्रीका मूल के प्राणी हैं और कांगो के जंगलों में इनकी अच्छी खासी संख्या पाई जाती है। इनका बर्ताव, हाव-भाव और औजारों का उपयोग करने की क्षमता उन्हें इंसानों के बहुत करीब बनाती है। इनकी भावनात्मक समझदारी इतनी विकसित होती है कि ये खुशी, दुख और सहानुभूति जैसी संवेदनाओं को भी महसूस कर सकते हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि पटना जू में पहले से मौजूद चिम्पांजी जोड़े—कार्तिक और सुभद्रा—का विशेष ध्यान रखा जाता है। सर्दियों में इन्हें कम्बल दिए जाते हैं, जिन्हें वे खुद ओढ़ते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि चिम्पांजी न केवल समझदार हैं बल्कि अपने देखभालकर्ता से भी जुड़ाव महसूस करते हैं।
कार्तिक और सुभद्रा को वर्ष 2012 में ओडिसा के नंदन कानन जूलॉजिकल पार्क से लाया गया था। मंत्री ने इन दोनों को नजदीक से देखा और इनकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों से बातचीत भी की।
कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव हरजोत कौर बम्हरा, पीसीसीएफ प्रभात कुमार गुप्ता और उद्यान के निदेशक हेमंत पाटिल समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने आगे बताया कि इस मानसून सीजन में मुख्यमंत्री वन महोत्सव के तहत 4 करोड़ 90 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान जनसहभागिता से संचालित किया जाएगा, जिसमें आम जनता को केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। उनका कहना था कि जब हर व्यक्ति अपने द्वारा लगाए गए पौधों की देखभाल करेगा, तभी राज्य का हरित आवरण तेजी से बढ़ेगा।
पटना जू में चिम्पांजियों की यह नई जोड़ी न केवल बच्चों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित होगी।
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