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  • पटना। कभी हर घर-आंगन में चहचहाने वाली गौरैया (Passer domesticus) आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है। शहरीकरण, मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन, कंक्रीट के जंगल और रासायनिक खेती की वजह से इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है। ऐसे में वन एवं पर्यावरण विभाग ने गौरैया कुटीर बनाने का फैसला किया है, जिससे इस छोटी, प्यारी और चहकती चिड़िया को संरक्षित किया जा सके।
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  • गौरैया कुटीर योजना क्या है?
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  • पटना के एसकेपुरी पार्क से इस पहल की शुरुआत होगी, जहां मिट्टी के छोटे-छोटे घर और बांसों की संरचना तैयार कर गौरैया के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जाएगा।
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  • गौरैया कुटीर की विशेषताएँ

  • छोटे-बड़े पार्कों में 100-150 वर्गफुट क्षेत्र में बांस और मिट्टी से बने घर
    बांस की चचरी में 33 एमएम व्यास के छेद, जिससे केवल गौरैया ही प्रवेश कर सके।
  • अंदर गौरैया के पसंदीदा पौधे – जैसे बैगनविलिया, मधुमालती, नींबू, अमरूद आदि।
  •  दाना-पानी और घोंसले रखने की उचित व्यवस्था।
  • इस प्रयास से गौरैया को पुनः अपने प्राकृतिक आवास जैसा माहौल मिलेगा, जिससे उनकी संख्या में वृद्धि होगी।
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  • गौरैया संरक्षण क्यों है महत्वपूर्ण?
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  • गौरैया न केवल हमारी पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि यह कृषि मित्र भी है, क्योंकि यह कीट-पतंगों को खाकर प्राकृतिक रूप से खेती की रक्षा करती है।
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  • गौरैया विलुप्त होने के कारण:

  • अत्यधिक शहरीकरण और जंगलों की कटाई
    मोबाइल टावरों से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स
    रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग
    आधुनिक घरों में घोंसला बनाने की जगह की कमी
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  • पटना में गौरैया कुटीर की शुरुआत
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  • वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमंडलीय वन संरक्षक सत्यजीत कुमार ने इस योजना की घोषणा की और बताया कि पटना के विभिन्न इलाकों में गौरैया संरक्षण हेतु प्रयास किए जाएंगे।

  • पटना के सभी बड़े और छोटे पार्कों में गौरैया कुटीर बनाए जाएंगे।
    यह पहल पर्यावरणविद संजय कुमार के मार्गदर्शन में संचालित होगी।
  • बांस और प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार घरों में गौरैया को सुरक्षित आवास मिलेगा।
    लोगों को गौरैया संरक्षण अभियान से जोड़ा जाएगा।
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  • गौरैया के अनुकूल पर्यावरण कैसे बनाएं?
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  • अगर आप अपने घर, सोसाइटी, या ऑफिस में गौरैया को वापस लाना चाहते हैं, तो ये तरीके अपनाएँ:
  • छोटी मिट्टी की परिंदों के लिए सुरक्षित जगह बनाएं।
  • अपने बगीचे या छत पर छोटे कांटेदार पौधे (बैगनविलिया, मधुमालती) लगाएं।
    घरों के बाहर दाना-पानी की व्यवस्था करें।
    प्लास्टिक के बजाय प्राकृतिक सामग्री से बने घोंसले का उपयोग करें।
    मोबाइल टावरों की संख्या को नियंत्रित करने की दिशा में कार्य करें।
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  • वन एवं पर्यावरण विभाग की आगामी योजनाएँ
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  • पटना में गौरैया संरक्षण के लिए वन विभाग जल्द ही गौरैया एक्शन प्लान लाने वाला है, जिसमें गौरैया पुनर्वास और संरक्षण के वैज्ञानिक उपाय शामिल होंगे।
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  • मुख्य कदम:

  • स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
    "अडॉप्ट ए स्पैरो" प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी, जिसमें लोग गौरैया संरक्षण में भाग ले सकेंगे।
    गौरैया उत्सव का आयोजन किया जाएगा, जहां गौरैया के महत्व पर चर्चा होगी।
    स्थानीय निवासियों को पौधे लगाने और बर्ड नेस्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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  • गौरैया संरक्षण में आपकी भागीदारी क्यों ज़रूरी है?
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  • गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण की अमूल्य धरोहर है। इसकी चहचहाहट हमें शुद्ध वातावरण का संकेत देती है। यदि हम समय रहते कदम नहीं उठाते, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल किताबों में ही गौरैया को देख पाएंगी।

  • अपने घर के आसपास पक्षियों के लिए घोंसले और पानी के बर्तन रखें।
    पेड़-पौधे लगाकर प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करें।
  •  जागरूकता फैलाएं और अन्य लोगों को गौरैया बचाने के लिए प्रेरित करें।