पटना। बिहार खेल विश्वविद्यालय 20-21 मार्च 2025 को शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान पर एक दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव आयोजित कर रहा है। इस आयोजन में देशभर से शिक्षाविद, खेल वैज्ञानिक, नीति निर्धारक और विशेषज्ञ शामिल होंगे और खेल विज्ञान एवं शारीरिक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर मंथन करेंगे।
- कार्यक्रम डिटेल क्या है?
- स्थान: बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर
तिथि: 20-21 मार्च 2025
उद्घाटन समारोह: 20 मार्च, सुबह 10:15 बजे
मुख्य वक्ता: मेजर जनरल एस. एन. मुखर्जी (पूर्व कुलपति, एलएनआईपीई, ग्वालियर) - शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान पर विशेष सत्र
- 10 तकनीकी सत्रों में होंगे गहन विचार-विमर्श
- इस कॉन्क्लेव में कुल 10 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश के प्रसिद्ध खेल वैज्ञानिक और शिक्षाविद विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे।
- प्रमुख वक्ता कौन-कौन?
- डॉ. ललित शर्मा (इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी)
खेल विज्ञान के आधुनिक पाठ्यक्रम और अनुसंधान पर चर्चा करेंगे। - डॉ. विक्रम सिंह (बीएचयू, वाराणसी)
शारीरिक शिक्षा के समकालीन दृष्टिकोण और खेल प्रशिक्षण तकनीकों पर प्रकाश डालेंगे। - रोशन कुमार (हेड, SPAAB, पटना)
"खेल विज्ञान में समकालीन मांगों को पूरा करने" पर चर्चा करेंगे। - शिशिर सिन्हा (कुलपति, बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर)
"खेल विश्वविद्यालयों की भूमिका और भविष्य की संभावनाएं" पर विचार साझा करेंगे। - खेल विज्ञान और शारीरिक शिक्षा पर क्यों हो रहा है यह कॉन्क्लेव?
- इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारत में खेल विज्ञान और शारीरिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान से जोड़ना है।
- खेल विज्ञान में नवीनतम अनुसंधान और नवाचारों पर चर्चा
खेल प्रदर्शन विश्लेषण (Performance Analysis) को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना
शारीरिक शिक्षा के नए पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण तकनीकों पर विमर्श
भारत में खेल शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना - बिहार खेल विश्वविद्यालय को मिली AIU सदस्यता–बड़ी उपलब्धि
- इस कॉन्क्लेव के दौरान एक और बड़ी घोषणा हुई है – भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने बिहार खेल विश्वविद्यालय को अपनी सदस्यता प्रदान कर दी है।
- AIU सदस्यता क्यों महत्वपूर्ण है?
- बिहार खेल विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलेगी।
इसे अन्य विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान और पाठ्यक्रम विकास का अवसर मिलेगा।
खेल शिक्षा और अनुसंधान में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के अवसर बढ़ेंगे।
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