भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। उनकी अस्थियों का विसर्जन सिख रीति-रिवाजों के अनुसार मजनू का टीला गुरुद्वारे के निकट यमुना नदी में किया गया। इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गांधी परिवार के सदस्य अनुपस्थित रहे, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरू हो गईं।
कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने इस संदर्भ में बयान जारी करते हुए कहा, "परिवार की निजता का सम्मान करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता अस्थि चयन और विसर्जन के लिए परिवार के साथ नहीं गए।" उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मनमोहन सिंह के निवास पर जाकर परिवार से मुलाकात की थी। खेड़ा ने यह भी उल्लेख किया कि अंतिम संस्कार के समय परिवार को पर्याप्त निजता नहीं मिल पाई थी, इसलिए अस्थि विसर्जन के समय उन्हें यह सम्मान दिया गया।
विपक्ष की आलोचना
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने कांग्रेस की इस अनुपस्थिति पर सवाल उठाए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, "यह देखना बेहद निराशाजनक है कि कांग्रेस पार्टी उनकी अंतिम यात्रा को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रही है, जिससे उनकी अंतिम यात्रा की गरिमा कम हो रही है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस इस शोक के क्षण को राजनीतिक लाभ के अवसर में बदलना चाहती है।
परिवार की निजता का सम्मान
मनमोहन सिंह के परिवार ने अस्थि विसर्जन के समय निजता की इच्छा व्यक्त की थी। कांग्रेस पार्टी ने इस निर्णय का सम्मान करते हुए वरिष्ठ नेताओं को इस प्रक्रिया से दूर रखा। यह कदम परिवार की भावनाओं और उनकी इच्छाओं के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है।
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