heart attack in astrology: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारे जीवन में होने वाली हर घटना का संबंध ग्रहों की स्थिति और उनकी चाल से होता है। यही नियम स्वास्थ्य पर भी लागू होता है। दिल के दौरे यानी हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी ग्रहों की स्थिति और कुंडली में मौजूद दोष हो सकते हैं। कुंडली में शनि, राहु, मंगल और चंद्रमा जैसे ग्रहों का गलत प्रभाव दिल की बीमारियों का संकेत देता है। इन ग्रहों की अशुभ स्थिति से हार्ट अटैक का योग बन सकता है।
कुंडली में हार्ट अटैक का योग कैसे बनता है?
शनि और राहु का प्रभाव: शनि और राहु का अशुभ प्रभाव दिल की बीमारियों का मुख्य कारण माना जाता है। शनि का अष्टम भाव में होना और राहु का छठे भाव में होना दिल के रोगों को बढ़ा सकता है।
मंगल और चंद्रमा का दोष: चंद्रमा का कमजोर होना और मंगल का कुंडली में दूषित स्थिति में होना दिल की बीमारियों का संकेत देता है। यह रक्तचाप और हृदय की समस्याओं का कारण बन सकता है।
सूर्य की अशुभ स्थिति: सूर्य का कमजोर होना शरीर में ऊर्जा की कमी और दिल की बीमारियों का कारण बनता है।
कुंडली में छठे, अष्टम और द्वादश भाव का दोष: इन भावों का ग्रहों से दूषित होना दिल से संबंधित बीमारियों का कारण बन सकता है।
हार्ट अटैक के ज्योतिषीय संकेत
छठे और अष्टम भाव में शनि या राहु का प्रभाव।
सूर्य और चंद्रमा का कमजोर या नीच राशि में होना।
मंगल और राहु का एक ही भाव में होना।
चंद्रमा का शनि से दृष्ट होना।
जन्म कुंडली में सूर्य पर राहु या केतु का प्रभाव।
हार्ट अटैक से बचाव के ज्योतिषीय उपाय
सूर्य की पूजा: रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें और "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। यह दिल की बीमारियों से बचाव में मदद करता है।
हनुमान जी की उपासना: हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह शनि और राहु के अशुभ प्रभाव को कम करता है।
नीलम रत्न धारण करें: ज्योतिषी से सलाह लेकर नीलम रत्न पहनें। यह शनि के अशुभ प्रभाव को कम करता है।
पीपल के पेड़ की पूजा: शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और उसकी परिक्रमा करें।
राहु के दोष को कम करें: राहु के प्रभाव को शांत करने के लिए नारियल का दान करें और "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का जाप करें।
स्वस्थ दिल के लिए ज्योतिष और आयुर्वेद का मेल
योग और ध्यान: नियमित योग और ध्यान करने से तनाव कम होता है और दिल की सेहत सुधरती है।
तुलसी का सेवन: रोज सुबह तुलसी के 3-4 पत्ते खाने से दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।
अंक ज्योतिष का उपयोग: दिल के स्वास्थ्य के लिए 6 और 8 अंक के प्रभाव को शांत करने के लिए ज्योतिषीय उपाय करें।
सकारात्मक सोच: ग्रहों का प्रभाव मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।
ग्रहों का दोष और दिल की बीमारियां: कैसे करें पहचान?
कुंडली का विश्लेषण करें: किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली का अध्ययन कराएं।
शनि की दशा: यदि शनि की महादशा या अष्टम भाव में शनि हो तो विशेष सतर्कता बरतें।
राहु और मंगल का योग: कुंडली में इन ग्रहों का एक ही स्थान पर होना हार्ट अटैक का संकेत देता है।
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