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flat earth, Jeren Campanella, Antarctica trip: अमेरिकी यूट्यूबर जेरन कैम्पानेला, जो स्वयं को 'फ्लैट अर्थर' मानते थे, ने अंटार्कटिका की यात्रा के बाद अपनी पूर्व धारणाओं को गलत स्वीकार किया है। उन्होंने इस यात्रा पर लगभग 32 लाख रुपये खर्च किए और 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की।

अंटार्कटिका में 24 घंटे सूर्य का अनुभव

कैम्पानेला का मानना था कि अंटार्कटिका एक विशाल 'बर्फ की दीवार' है, जहां हर दिन सूर्य उगता और डूबता है। हालांकि, अंटार्कटिका पहुंचने पर उन्होंने देखा कि वहां की गर्मियों में 24 घंटे सूर्य दिखाई देता है, जो उनकी अपेक्षाओं के विपरीत था। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर स्वीकार किया, "मैं गलत था। अंटार्कटिका में वास्तव में 24 घंटे सूर्य होता है।"

पृथ्वी के गोलाकार होने के प्रमाण

यह पहली बार नहीं है जब 'फ्लैट अर्थ' सिद्धांत को चुनौती दी गई है। कोलोराडो के पादरी विल डफी ने भी 'अंतिम प्रयोग' नामक अभियान में फ्लैट अर्थर्स और ग्लोब अर्थर्स को अंटार्कटिका भेजा था, जहां उन्होंने मध्यरात्रि के सूर्य को देखा, जो पृथ्वी के गोलाकार होने का प्रमाण है।

मध्यरात्रि का सूर्य: गोल पृथ्वी का संकेत

मध्यरात्रि का सूर्य पृथ्वी के गोल आकार और धुरी पर झुकाव का सबसे ठोस सबूत है। यह घटना केवल घूमते हुए और झुके हुए गोले पर ही संभव है। पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, जिससे अंटार्कटिका में गर्मियों में 24 घंटे सूर्य दिखाई देता है।

कैम्पानेला की स्वीकारोक्ति

यात्रा के अंत में, कैम्पानेला ने अपने विचारों में बदलाव किया और सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनकी धारणा गलत थी। उन्होंने विज्ञान और पृथ्वी की वास्तविकता को मानते हुए कहा कि पृथ्वी वास्तव में गोल है। 

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