img

क्रिकेट के मैदान पर विराट कोहली अक्सर अपनी आक्रामक शैली और ज़बरदस्त ऊर्जा के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हाल ही में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) पर सैम कॉन्स्टास के साथ हुई कंधे की टक्कर के बाद कई लोगों ने फिर से उनकी खेल भावना और बर्ताव पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया के एक पूर्व कप्तान ने कोहली के पक्ष में बयान देते हुए कहा है कि वह बिल्कुल भी नकारात्मक व्यक्ति नहीं हैं।

कंधे की टक्कर से शुरू हुआ विवाद

एमसीजी में हुए इस वाकये के दौरान, कोहली और सैम कॉन्स्टास की हल्की-सी कंधे की भिड़ंत कैमरे में क़ैद हो गई। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होते ही चर्चा शुरू हो गई कि क्या कोहली ने जानबूझकर ऐसा किया या यह महज़ संयोग था। कोहली की पुरानी आक्रामक छवि को देखते हुए कुछ आलोचक उनके रवैये पर सवाल उठाने लगे।

‘वह नकारात्मक व्यक्ति नहीं हैं’

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज, जो खुद एक समय टीम की कमान संभाल चुके हैं, ने विराट कोहली का पुरज़ोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि कोहली भले ही मैदान पर आक्रामक दिखते हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनका इरादा दूसरे खिलाड़ियों को नुकसान पहुँचाने का होता है। उनके अनुसार, कोहली हमेशा ही परिणाम के प्रति जुनूनी रहते हैं, और मैच के दौरान उनका फोकस जीतने पर रहता है। कई बार भावनाओं के ज्वार में आकर ऐसी छोटी-छोटी घटनाएं हो जाती हैं, जिन्हें जानबूझकर किया गया ग़लत व्यवहार कहना उचित नहीं होगा।

कोहली की छवि पर चर्चा

विराट कोहली की छवि क्रिकेट प्रेमियों के बीच दो धड़ों में बँटी हुई है—एक ओर वे प्रशंसक हैं जो उनकी आक्रामकता को “आत्मविश्वास और जुनून” का रूप मानते हैं, तो दूसरी ओर वे लोग हैं जो इसे “अति-उत्साही और कभी-कभी धौंस जमाने वाला” क़रार देते हैं। यह पहली बार नहीं है जब कोहली अपने व्यवहार या अंदाज़ को लेकर विवादों में फँसे हैं। इससे पहले भी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ उनकी अनबन की ख़बरें मीडिया की सुर्ख़ियाँ बन चुकी हैं। बावजूद इसके, कोहली ने कई मैचों में बेहतरीन खेल भावना का परिचय दिया है, जहाँ उन्होंने विरोधी टीम के खिलाड़ियों की तारीफ़ करने से भी परहेज़ नहीं किया।

खेल भावना और विवादों का अंत

क्रिकेट में खेल भावना (स्पोर्ट्समैनशिप) को बहुत महत्व दिया जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मैदान पर किसी भी घटना को संदर्भ से काटकर देखना उचित नहीं होता। मैच की गर्मजोशी और दोनों टीमों की जीत की चाह के बीच कभी-कभी टकराव जैसी घटनाएं सामने आ जाती हैं। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के बयान से यही पता चलता है कि हमें किसी खिलाड़ी को सिर्फ़ एक या दो घटनाओं के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। कोहली एक बेहतरीन बल्लेबाज़ और तेज़-तर्रार कप्तान रहे हैं, जिनकी उग्र शैली ही उन्हें सबसे अलग बनाती है। लेकिन जब बात निजी व्यवहार की आती है, तो उनके समर्थक कई उदाहरण भी देते हैं, जहाँ उन्होंने काफी सौहार्द्रपूर्ण रवैया अपनाया।