देशभर में साइबर अपराध का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ठगों के निशाने पर अब सबसे ज्यादा बुजुर्ग आ रहे हैं, जिन्हें तकनीक के कम ज्ञान का फायदा उठाकर जाल में फंसाया जा रहा है। ताजा मामला चेन्नई का है, जहां 81 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करीब 2.27 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी का शिकार बना लिया गया।
मार्च से अप्रैल के बीच रची गई थी ठगी की पूरी पटकथा
यह साइबर फ्रॉड मार्च के मध्य से अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। पीड़ित बुजुर्ग ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी इस धोखाधड़ी में गंवा दी। सब कुछ एक फोन कॉल से शुरू हुआ, जब 15 मार्च को बुजुर्ग के पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को TRAI अधिकारी बताते हुए दावा किया कि बुजुर्ग के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर केनरा बैंक में एक फर्जी अकाउंट खोला गया है।
शुरुआत में बुजुर्ग को बात समझ नहीं आई क्योंकि कॉल हिंदी में था। जल्द ही तमिल बोलने वाला एक व्यक्ति कॉल में शामिल हुआ और विश्वास में लेकर बताया कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए किसी से चर्चा न करें। इसके बाद बुजुर्ग को यह यकीन दिलाया गया कि यह गलती उनकी तरफ से हुई है और वे गंभीर कानूनी संकट में हैं।
नकली वर्चुअल कोर्ट और डिजिटल गिरफ्तारी का ड्रामा
ठगों ने पीड़ित को लगातार डराया और विश्वास दिलाया कि उन्हें और उनकी पत्नी को सीबीआई द्वारा हिरासत में लिया जा सकता है। इसके लिए एक नकली डिजिटल कोर्ट तैयार किया गया, जिसमें फर्जी जज की मौजूदगी में सुनवाई की नौटंकी की गई। बुजुर्ग को बताया गया कि वे और उनकी पत्नी डिजिटल अरेस्ट में सात दिनों के लिए सीबीआई की निगरानी में रहेंगे।
59 लाख से शुरुआत, धीरे-धीरे निकलवा लिए करोड़ों रुपये
पहले चरण में बुजुर्ग को 59 लाख रुपये एक खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया। इसके बाद आरोपियों ने उनकी FD तुड़वाकर, बैंक अकाउंट से बड़ी रकम निकलवाकर, टुकड़ों में पूरी 2.27 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर करवा ली। बुजुर्ग को डराया गया कि यदि वे किसी को बताएंगे, तो उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।
बेटा-बेटी से पैसे मांगने और प्रॉपर्टी बेचने तक का दबाव
साइबर ठगों ने यहां तक कह दिया कि अब उन्हें अपने बच्चों से पैसे मंगवाने चाहिए, और जरूरत पड़ी तो अपनी संपत्ति भी बेच दें। बुजुर्ग इतने भयभीत हो चुके थे कि उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। आखिरकार एक दिन उन्होंने अपने दामाद को फोन कर बुलाया, जिससे सारा मामला सामने आया और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
अब जांच में जुटी साइबर सेल, बुजुर्ग की हालत गंभीर
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल उन नंबरों और खातों की पड़ताल कर रही है, जिनके जरिए पैसे ट्रांसफर कराए गए। इस घटना से यह साफ हो गया है कि साइबर अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल करके बहुत ही सुनियोजित तरीके से लोगों को फंसाते हैं।
सबक: बुजुर्गों को डिजिटल साक्षरता की जरूरत
यह घटना उन सभी परिवारों के लिए चेतावनी है, जिनके बुजुर्ग तकनीक से कम परिचित हैं। उन्हें समय-समय पर सतर्क करना और सिखाना जरूरी है कि किसी भी अनजान कॉल पर न तो निजी जानकारी दें और न ही किसी डर की स्थिति में पैसे ट्रांसफर करें। पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही हैं।
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