img

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक बार फिर बिहार की सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। अपराधी खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से वे पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं। चिराग का यह बयान सत्ता पक्ष को असहज कर सकता है, जबकि विपक्ष को इससे थोड़ी राहत मिल सकती है।

पुलिस पर गंभीर आरोप: रिश्वत के बदले अपराधियों को संरक्षण

चिराग पासवान ने साफ तौर पर कहा कि थानों में अपराधियों से पैसा लेकर पुलिसकर्मी उन्हें बचाते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब तक भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बिहार की कानून-व्यवस्था में कोई सुधार संभव नहीं है। चिराग ने यह बयान वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड अंतर्गत पीरापुर गांव में दिया, जहां वे संजना भारती के परिजनों से मिलने पहुंचे थे।

संजना कांड: एक बेटी, एक परिवार और एक लापरवाह सिस्टम

गौरतलब है कि पीरापुर गांव की रहने वाली 17 वर्षीय संजना भारती 27 मई को अचानक गायब हो गई थी। परिजनों ने उसकी खोज में थाना से लेकर एसपी कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। लगभग 43 दिन बाद उसका शव गांव के एक सुनसान इलाके में जमीन के नीचे दफन मिला।

इस भयावह घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पीड़ित परिवार की ओर से बार-बार शिकायत करने के बावजूद, स्थानीय गोरौल और भगवानपुर थाना ने शव मिलने तक भी केस दर्ज नहीं किया था। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद ही एसपी ने दोनों थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया।

अभी तक गिरफ्त से बाहर हैं आरोपी

चिराग पासवान ने प्रशासन से सवाल किया कि जब केस उजागर होने के बाद भी आरोपी अब तक फरार हैं, तो क्या इसे पुलिस की नाकामी नहीं माना जाए? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी पक्ष से मिली हुई है और पीड़ित परिवार को केस वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताते हुए पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की।

विपक्ष को मिला मुद्दा, सरकार पर बढ़ा दबाव

चिराग पासवान के इस बयान से जहां विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका मिलेगा, वहीं सत्तारूढ़ दल के लिए यह बयान एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। खासकर तब, जब यह टिप्पणी एक केंद्रीय मंत्री की ओर से आई हो, जो खुद एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं।