- पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पटना जिले के बिक्रम प्रखंड में स्थित बिक्रम लॉक कैनाल बैंक सौर ऊर्जा परियोजना का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह परियोजना इसी दिशा में एक प्रभावी कदम है।
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- सौर ऊर्जा से बदलेगा बिहार का ऊर्जा परिदृश्य
- मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने जानकारी दी कि नहरों, तटबंधों, बांधों और नदियों के किनारे खाली पड़ी जमीनों का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि वहां सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जा सके।
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- यह पहल स्वच्छ, प्रदूषण रहित ऊर्जा को बढ़ावा देगी
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी
- पर्यावरण संतुलन में मदद मिलेगी
- स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे
- ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा
- मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “हरियाली और हर घर बिजली – यही है हमारी असली प्रगति।”
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- हर घर बिजली योजना का उल्लेख
- नीतीश कुमार ने कहा कि हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब सरकार की प्राथमिकता यह है कि लोगों को सस्ती, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे। उन्होंने दावा किया कि बिजली की उपलब्धता को लेकर राज्य ने बीते कुछ वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है।
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- बिक्रम सौर ऊर्जा परियोजना का निरीक्षण
- मुख्यमंत्री ने परियोजना स्थल पर पहुंचकर बिक्रम लॉक कैनाल बैंक सौर ऊर्जा परियोजना का जायजा भी लिया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह परियोजना जल-जीवन-हरियाली मिशन के दसवें घटक – “सौर ऊर्जा के प्रयोग और ऊर्जा संरक्षण” के तहत शुरू की गई है। यह राज्य सरकार के हरित ऊर्जा लक्ष्य को पाने की दिशा में एक मॉडल परियोजना साबित होगी।
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- दो मेगावाट की क्षमता, 25 साल का अनुबंध
- इस परियोजना के तहत पटना जिले के बिक्रम क्षेत्र में मुख्य नहर के किनारे जल संसाधन विभाग की जमीन पर दो मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है।
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- परियोजना में राज्य सरकार की कोई वित्तीय हिस्सेदारी नहीं है
- यह संयंत्र निजी क्षेत्र द्वारा स्थापित किया गया है
- राज्य सरकार और कंपनी के बीच 25 वर्षों का अनुबंध हुआ है
- ऊर्जा विभाग को बिजली की आपूर्ति ₹3.10 प्रति यूनिट की दर से की जाएगी
- यह मॉडल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के सफल उदाहरणों में से एक है, जहां बिना सरकारी निवेश के राज्य को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा मिल रही है।