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पटना: बिहार सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन’ नीति अब धरातल पर नजर आने लगी है। वर्ष 2025 के पहले छह महीनों में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में जबरदस्त तेजी दिखाई है। इस अवधि में ब्यूरो ने रिकॉर्ड 51 मामले दर्ज किए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है। यह जानकारी सोमवार को ‘प्रथम सतर्कता सम्मान समारोह 2025 सह कार्यशाला’ के अवसर पर ब्यूरो के महानिदेशक श्री जितेंद्र सिंह गंगवार ने दी।

इस समारोह का आयोजन पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के सभागार में किया गया, जहां ऐसे सजग नागरिकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने भ्रष्ट लोकसेवकों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार और आईजी गरिमा मलिक ने इन जांबाज नागरिकों को सम्मानित कर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में उनकी भूमिका की सराहना की।

भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो का सख्त रुख
इस मौके पर डीजी गंगवार ने बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत से ही ब्यूरो सक्रियता के नए रिकॉर्ड बना रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार ‘सतर्कता सम्मान समारोह’ का आयोजन हुआ है, लेकिन अब इसे नियमित रूप से हर तीन महीने में आयोजित किया जाएगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष की शुरुआत से अब तक 45 लोकसेवकों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। यह संख्या वर्ष 2024 के मुकाबले काफी अधिक है, जब पूरे साल में मात्र 8 मामलों में 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग पर भी कार्रवाई
निगरानी ब्यूरो ने न सिर्फ घूसखोरी के मामलों में कार्रवाई की, बल्कि आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामलों में भी कड़ी नजर बनाए रखी। अब तक छह मामलों में 7 लोगों को आय से अधिक संपत्ति के मामलों में आरोपी बनाया गया है। वहीं, पद के दुरुपयोग के तीन मामलों में कुल 21 लोगों को नामजद किया गया है।

ब्यूरो ने 2025 में कई प्रमुख घूसकांडों में आरोपियों की गिरफ्तारी की है, जिनमें मधुबनी के राजस्व कर्मचारी अजय कुमार मंडल, पूर्वी चंपारण के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार, सासाराम के कंप्यूटर ऑपरेटर आकाश कुमार दास, किशनगंज के अमीन निरंजन प्रसाद दांगी, और मुजफ्फरपुर के पुलिस अवर निरीक्षक रौशन कुमार सिंह शामिल हैं। सभी को घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया।

विभागवार कार्रवाई का लेखा-जोखा
2025 की पहली छमाही में जिन 42 मामलों में गिरफ्तारी हुई है, उनमें सबसे ज्यादा यानी 15 केस राजस्व विभाग से जुड़े थे। इसके बाद पुलिस विभाग से 12, ग्रामीण विकास और शिक्षा विभाग से 3-3, स्वास्थ्य विभाग से 2, जबकि ऊर्जा, पंचायती राज, योजना एवं विकास, नगर निगम, मत्स्य और समाहरणालय से एक-एक अधिकारी को गिरफ्तार किया गया।

आईजी गरिमा मलिक की अपील
आईजी गरिमा मलिक ने इस अवसर पर कहा कि निगरानी ब्यूरो भ्रष्टाचार के विरुद्ध सजग और प्रतिबद्ध है। इस तरह के सतर्कता सम्मान समारोह से लोगों को प्रेरणा मिलेगी और समाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ जनसहभागिता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि जो नागरिक भ्रष्टाचार की सूचना देकर दोषियों को पकड़वाते हैं, उन्हें सम्मानित किया जाएगा ताकि दूसरों को भी ऐसी जागरूकता के लिए प्रेरित किया जा सके।

सम्मानित नागरिकों की प्रेरणादायक कहानियां
इस कार्यक्रम में भोजपुर की सिकंती देवी ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए सरकारी योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने उनसे ₹10,000 की रिश्वत मांगी। उन्होंने निगरानी ब्यूरो को इसकी जानकारी दी, और फिर आरोपी को रंगेहाथ पकड़ लिया गया।

वहीं, सीतामढ़ी के कामेश ठाकुर ने बताया कि दाखिल-खारिज के लिए राजस्व कर्मचारी ने उनसे ₹51,000 की मांग की थी। उन्होंने भी निगरानी ब्यूरो को सूचित किया और आरोपी को पकड़वाया।

उपस्थित रहे वरिष्ठ अधिकारी और नागरिक
कार्यक्रम में डीआईजी नवीन कुमार झा, डीआईजी मृत्युंजय कुमार के अलावा सम्मानित नागरिकों में नीरज कुमार, संतोष कुमार, अवधेश प्रसाद सिन्हा, कामेश ठाकुर, अनिल कुमार राय, गौरी शंकर सिंह, सिकंती देवी और रवि कुमार मौजूद रहे। यह आयोजन बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ है।