- बिहार में 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद, राज्य ने एक स्वस्थ और प्राकृतिक विकल्प की ओर रुख किया है—नीरा। ताड़ के पेड़ों से प्राप्त इस पौष्टिक और गैर-मादक पेय की लोकप्रियता अब तेजी से बढ़ रही है। केवल अप्रैल से 10 जुलाई 2025 के बीच ही 1 करोड़ 80 लाख लीटर से अधिक नीरा का संग्रहण हुआ है, जिसमें से 1 करोड़ 39 लाख लीटर से अधिक नीरा की बिक्री हो चुकी है। यह बढ़ता हुआ आंकड़ा इस बात का संकेत है कि राज्य के नागरिकों ने इसे अपनाया है और यह अब एक स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में अपनी जगह बना चुका है।
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- हर दिन एक लाख लीटर से अधिक का उत्पादन
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- नीरा उत्पादन की मौजूदा रफ्तार भी चौंकाने वाली है। पिछले सप्ताह में ही 4 लाख 87 हजार 532 लीटर नीरा का संग्रह किया गया, जो औसतन प्रतिदिन एक लाख लीटर से ज्यादा है। राज्यभर में 2,309 बिक्री काउंटरों के माध्यम से इसे बाजार तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे लोगों को आसानी से यह उपलब्ध हो रहा है।
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- नीरा: सेहत का संजीवनी पेय
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- आबकारी आयुक्त रजनीश कुमार सिंह के अनुसार, नीरा को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर:
- यह प्राकृतिक ऊर्जा का स्रोत है
- इसमें विटामिन-C, एंजाइम्स, और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है
- ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए सुरक्षित है
- नीरा में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, फास्फोरस और सोडियम जैसे खनिज पाए जाते हैं
- इसका सेवन नशा रहित होता है और यह पाचन को बेहतर बनाता है
- इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं
- नीरा अब केवल एक पारंपरिक पेय नहीं, बल्कि हेल्थ ड्रिंक के रूप में राज्य की नई पहचान बन रही है।
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- नीरा से बदल रही है ताड़ी व्यवसायियों की जिंदगी
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- मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना, जो इस वर्ष शुरू की गई है, ने ताड़ी से जुड़े समुदायों को स्थायी रोजगार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहले से संचालित मुख्यमंत्री सतत जीवकोपार्जन योजना को अब नीरा के उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए और सशक्त बनाया गया है।
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- योजना के तहत अब तक 10,646 टैपर्स (नीरा उतारने वाले) और 11,176 ताड़ के पेड़ मालिकों को जोड़ा गया है
- इनमें सबसे ज्यादा 1,632 टैपर्स वैशाली जिले से, 1,184 गया, 880 नालंदा, 749 मुजफ्फरपुर, और 664 पटना जिले से जुड़े हैं
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- वहीं ताड़ के पेड़ मालिकों में वैशाली (648), नालंदा (509), नवादा (254), गया (207), और पटना (190) से सबसे ज्यादा लोग योजना में शामिल हैं
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- इन सभी लाभार्थियों को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है।