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पटना। बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जिसने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को कंप्यूटरकृत करने में सबसे अधिक प्रगति की है। यह पहल कृषि और सहकारी क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • क्या है PACS और इसका कंप्यूटरकरण क्यों जरूरी था?
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  • PACS (Primary Agricultural Credit Societies) ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कर्ज, खाद-बीज, भंडारण और अन्य सुविधाएं देने वाली प्राथमिक सहकारी समितियां होती हैं। पहले इनके रिकॉर्ड मैन्युअल रूप से रखे जाते थे, जिससे पारदर्शिता की कमी, भ्रष्टाचार, और डेटा की गड़बड़ी होती थी। डिजिटलीकरण के बाद ये समस्याएं खत्म हो रही हैं।
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  • पहले चरण में कितनी PACS हुईं कंप्यूटरकृत?
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  • पहले चरण में: 4,477 पैक्सों का कंप्यूटरकरण पूरा
     ई-पैक्स घोषित किए गए: 292
    सिस्टम ऑडिट पूरा: 2,548 पैक्स
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  • अब इन पैक्सों में सभी गतिविधियां डिजिटल माध्यम से संचालित हो रही हैं, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता और सुगमता आई है।
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  • PACS के कंप्यूटरकरण से क्या-क्या फायदे हुए?
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  • डेटा सुरक्षित और पारदर्शी हुआ
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  • अब पैक्सों के सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में संग्रहीत किए जा रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी और अनियमितताओं पर रोक लगी है।
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  • किसानों को सीधा लाभ
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  • अब किसानों के ऋण और सरकारी अनुदान की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर हो रही है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका खत्म हो गई है।
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  • सहकारी समितियों का बेहतर समन्वय
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  • कंप्यूटरकरण के बाद PACS अब अन्य सहकारी समितियों, सहकारी बैंकों और सरकारी विभागों से सीधे जुड़ गई हैं, जिससे तेजी से कार्यों का निष्पादन संभव हुआ है।
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  • वित्तीय समावेशन को बढ़ावा
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  • कृषि क्षेत्र में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग को बढ़ावा मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
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  • बेहतर ऋण सुविधा
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  • अब PACS से ऋण लेना आसान और पारदर्शी हो गया है, क्योंकि पूरा डेटा ऑनलाइन उपलब्ध है और किसानों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से गुजरना नहीं पड़ता।
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  • PACS कंप्यूटरकरण – बिहार क्यों बना नंबर वन?
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  • बिहार ने इस परियोजना को तीव्र गति से लागू किया और अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक PACS को डिजिटल किया।
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  • प्रभावी सरकारी नीतियां और योजनाएं
    तेजी से कार्यान्वयन और मॉनिटरिंग
    तकनीकी प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
    डिजिटल इंडिया मिशन के तहत राज्य सरकार का सहयोग
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  • PACS कंप्यूटरकरण के दूसरे चरण की तैयारी शुरू
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  • अब दूसरे चरण की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है, जिसमें शेष PACS को कंप्यूटरकृत किया जाएगा। इससे बिहार की सभी प्राथमिक कृषि साख समितियां डिजिटल हो जाएंगी और संपूर्ण सहकारी प्रणाली पारदर्शी हो जाएगी।