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  • Bihar Land Digitization: बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और आम जनता की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बड़ी डिजिटल पहल की शुरुआत कर दी है। अब सभी पुराने भूमि अभिलेखों को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता, सुरक्षा और सुविधा—तीनों में इजाफा होगा।
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  • निबंधन कार्यालयों के पुराने रिकॉर्ड होंगे अब ऑनलाइन
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  • मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने एक व्यापक योजना के तहत पुराने रजिस्ट्री अभिलेखों को स्कैन कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल से न केवल दस्तावेज़ सुरक्षित रहेंगे, बल्कि ज़मीन के असली मालिक की जानकारी भी एक क्लिक में मिल सकेगी। जुलाई 2025 के अंत तक पहला चरण पूरा होने की उम्मीद है, जिसमें 1990 से 1995 के बीच के 50 लाख से ज्यादा दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
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  • तीन चरणों में पूरे होंगे 4.17 करोड़ से ज्यादा दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन
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  • विभाग की योजना के मुताबिक कुल 4 करोड़ 17 लाख दस्तावेजों को डिजिटल फॉर्म में तब्दील किया जाएगा। यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी:
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  • पहला चरण: 1990 से 1995 के बीच के अभिलेखों को स्कैन और अपलोड करना (कार्य प्रगति पर है)
  • दूसरा चरण: 1948 से 1990 के दौरान के लगभग 2.23 करोड़ दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन
  • तीसरा चरण: 1908 से 1947 के बीच के करीब 1.44 करोड़ दस्तावेजों को ऑनलाइन लाना
  • यहां तक कि 1796 से भी पुराने भूमि रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद हैं। इन्हें सुरक्षित रखना न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि बढ़ते भूमि विवादों को देखते हुए भी जरूरी हो गया है।
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  • पुराने दस्तावेजों की डिजिटल सुरक्षा बनेगी कानूनी सबूत की नई रीढ़
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  • विभाग के अनुसार, कुल दस्तावेजों में 99% से अधिक भूमि से संबंधित हैं। ये कागजी रिकॉर्ड समय के साथ खराब हो सकते हैं या लुप्त भी हो सकते हैं। डिजिटाइजेशन न केवल उन्हें स्थायी रूप से सुरक्षित रखेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल डाउनलोड कर उपयोग में लाया जा सकेगा—जिससे भूमि विवादों के मामलों में कानूनी साक्ष्य के तौर पर मजबूत आधार तैयार किया जा सकेगा।
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  • घर बैठे डाउनलोड की सुविधा भी होगी उपलब्ध
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  • महानिरीक्षक निबंधन रजनीश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि डिजिटाइजेशन के बाद कोई भी नागरिक अपने घर से भूमि दस्तावेजों को ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेगा। यह सुविधा विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूर-दराज़ के लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। विभाग इस योजना को "युद्धस्तर पर" अंजाम दे रहा है।
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  • तीन-स्तरीय प्रक्रिया से दस्तावेज होंगे सार्वजनिक
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  • दस्तावेजों को डिजिटाइज करने के लिए तीन प्रमुख चरण अपनाए जा रहे हैं:
  • स्कैनिंग: सभी पुराने कागजी दस्तावेजों को उच्च गुणवत्ता में स्कैन किया जा रहा है।
  • डेटा एंट्री और अपलोडिंग: स्कैन की गई फाइलों की जानकारी डिजिटल फॉर्मेट में दर्ज की जा रही है।
  • पब्लिक एक्सेस: अंतिम चरण में यह सभी दस्तावेज जनता के उपयोग के लिए पोर्टल पर उपलब्ध होंगे।
  • इससे आम नागरिकों को दस्तावेज़ खोजने में न केवल आसानी होगी, बल्कि रजिस्ट्री ऑफिस के कर्मचारियों पर भी बोझ कम होगा। साथ ही भू-माफिया द्वारा फर्जीवाड़े या हेरफेर की आशंका में भी बड़ी गिरावट आएगी।
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  • भविष्य की तैयारी – सटीक और सुरक्षित भू-रिकॉर्ड
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  • यह पहल बिहार को डिजिटल इंडिया अभियान से जोड़ते हुए उसे एक टेक-सक्षम और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में अग्रसर करेगी। जब हर ज़मीन का रिकॉर्ड सुरक्षित, प्रमाणित और आसानी से उपलब्ध होगा, तो राज्य में भूमि विवादों की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है।