- पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के नेतृत्व में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस धरने में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के संयोजक प्रशांत किशोर भी शामिल हुए। इस विधेयक को लेकर मुस्लिम संगठनों और कई विपक्षी दलों में नाराजगी है।
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- AIMPLB के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन
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- वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसी के तहत पटना के गर्दनीबाग में धरना प्रदर्शन किया गया, जिसमें विभिन्न मुस्लिम संगठनों और विपक्षी नेताओं ने भाग लिया।
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- देशभर के मुस्लिम संगठनों की भागीदारी
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- इस विरोध प्रदर्शन में बिहार समेत देश के अन्य राज्यों से भी मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), जन सुराज पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेता भी धरने में पहुंचे।
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- तेजस्वी यादव का बयान: हर हाल में करेंगे विरोध
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- तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद यादव खुद बीमार होने के बावजूद इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हर हाल में वक्फ विधेयक के खिलाफ खड़ी रहेगी।
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- विधानसभा और संसद में विरोध का दावा
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- तेजस्वी यादव ने कहा कि हमने विधानसभा और विधान परिषद में इस बिल का जमकर विरोध किया और कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर इस पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि हम किसी भी कीमत पर इस विधेयक को पास नहीं होने देंगे।
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- प्रशांत किशोर का समर्थन और जन सुराज की भागीदारी
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- जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। यह दिखाता है कि वक्फ विधेयक के खिलाफ विरोध केवल मुस्लिम संगठनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य राजनीतिक नेता भी इसे लेकर मुखर हैं।
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- वक्फ विधेयक पर उनकी राय
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- प्रशांत किशोर ने कहा कि यह विधेयक धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
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- सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का बयान
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- समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि सरकार अलोकतांत्रिक तरीके से धार्मिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
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- सरकार पर धार्मिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप
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- उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मुस्लिम वक्फ संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में हिंदू मंदिरों और अन्य धार्मिक ट्रस्टों पर भी असर डाल सकता है।
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