- पटना: समाजवादी आंदोलन के प्रखर नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर लोहिया उद्यान, लोहिया नगर, कंकड़बाग में भव्य राजकीय समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
-
- इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि तथा कई गणमान्य राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्व. राम मनोहर लोहिया की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
-
- समारोह में देशभक्ति के रंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान समारोह
-
- इस आयोजन में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कलाकारों ने देशभक्ति गीत और बिहार गीत का गायन किया, जिसने पूरे माहौल को देशप्रेम और समाजवादी विचारधारा के प्रति श्रद्धा से भर दिया। साथ ही, आरती पूजन कर लोहिया जी की स्मृति को नमन किया गया।
-
- इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. लोहिया के समाजवादी सिद्धांतों, उनकी विचारधारा और संघर्षशील जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोहिया जी का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सामाजिक, आर्थिक और जातिविहीन समाज की स्थापना के लिए भी लगातार संघर्षरत रहे।
-
- डॉ. राम मनोहर लोहिया: एक क्रांतिकारी समाजवादी नेता
-
- डॉ. राम मनोहर लोहिया भारतीय राजनीति के एक महान विचारक, स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी आंदोलन के प्रखर नेता थे। वे अपने क्रांतिकारी विचारों, निर्भीक नेतृत्व और जाति-प्रथा, सामाजिक असमानता, आर्थिक अन्याय और लोकतंत्र के हनन के खिलाफ संघर्ष के लिए जाने जाते हैं।
-
- डॉ. लोहिया के प्रमुख विचार
-
- जाति-व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन – वे जातिविहीन समाज की स्थापना के प्रबल समर्थक थे।
- सामाजिक समानता – महिलाओं, दलितों और पिछड़े वर्गों को समाज में समान अधिकार दिलाने के पक्षधर थे।
- न्यायपूर्ण आर्थिक व्यवस्था – वे ‘समान अवसर’ और गरीबों को अधिकार देने की नीति के पक्षधर थे।
- अंग्रेजी हटाओ आंदोलन – उन्होंने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए अंग्रेजी हटाने का आंदोलन चलाया।
- ‘रोज़गार दो’ नीति – उन्होंने बेरोजगारी हटाने के लिए सरकार से नीति-निर्धारण की मांग की।
- डॉ. लोहिया का विचार था कि भारत को एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर, जातिविहीन, भेदभाव रहित और समाजवादी राष्ट्र के रूप में विकसित होना चाहिए।
-
- वक्ताओं ने लोहिया जी के विचारों को अपनाने पर दिया बल
-
- समारोह में शामिल वक्ताओं ने कहा कि आज की राजनीति में डॉ. लोहिया के विचारों को अपनाने की अत्यधिक आवश्यकता है। उनके अनुसार: लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए स्वच्छ राजनीति जरूरी है। शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान देकर गरीबी दूर की जा सकती है। महिलाओं को समान अधिकार देकर समाज को प्रगतिशील बनाया जा सकता है।
-
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा, “डॉ. लोहिया केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक क्रांति के प्रतीक थे। उन्होंने समानता, सामाजिक न्याय और लोकशाही के लिए जो योगदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
-
- राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी कहा कि “डॉ. लोहिया के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। समाज में जातिवाद और आर्थिक असमानता को खत्म करने के लिए उनके विचारों को अपनाना जरूरी है।”
-
- लोहिया जी की विचारधारा को आगे बढ़ाने का संकल्प
-
- इस समारोह के माध्यम से लोहिया जी के विचारों और आदर्शों को समाज में और अधिक प्रचारित करने का संकल्प लिया गया। समाजवादी नेताओं ने इस अवसर पर युवाओं से आह्वान किया कि वे समाजवादी मूल्यों को आत्मसात कर एक नए भारत के निर्माण में योगदान दें। समाजवाद के इस नायक को समर्पित इस राजकीय समारोह ने लोहिया जी के संघर्ष, उनके विचारों और उनके योगदान को याद कर एक नई प्रेरणा दी।