- बिहार में मखाना उद्योग को संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने मखाना बोर्ड के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। माननीय उप मुख्यमंत्री-सह-कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
-
- बिहार में राजस्व और रोजगार का उत्प्रेरक बनेगा मखाना बोर्ड
-
- श्री विजय कुमार सिन्हा ने बैठक में कहा कि मखाना बोर्ड के गठन से किसानों, उद्यमियों और छोटे व्यवसायियों को व्यापक लाभ मिलेगा। यह बोर्ड मखाना की खेती को परंपरागत क्षेत्रों से आगे ले जाकर गैर-परंपरागत क्षेत्रों में भी बढ़ावा देगा, जिससे राज्य में कृषि आधारित उद्योग को नई दिशा मिलेगी।
-
- मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़े विभिन्न घटकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए बोर्ड के बजट का 50% हिस्सा इस दिशा में उपयोग किया जाएगा। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि मखाना उद्योग से जुड़े हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी।
-
- मखाना उद्योग के पूरे इकोसिस्टम के विकास में सहायक होगा मखाना बोर्ड
-
- मंत्री जी ने कहा कि मखाना बोर्ड का गठन राज्य के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। मखाना आधारित फसल चक्र को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में वृद्धि की जाएगी। इसके लिए उन्नत कृषि तकनीकों और आधुनिक विपणन पद्धतियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
-
- मखाना को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बास्केट में शामिल करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इससे किसानों को मखाना उत्पादन का उचित मूल्य मिल सकेगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
-
- गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान
-
- आज के वैश्विक व्यापार परिदृश्य में गुणवत्ता और प्रमाणन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए श्री सिन्हा ने मखाना के जैविक उत्पादन और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। यह पहल न केवल बिहार के मखाना को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाएगी बल्कि इसे प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित करने में भी सहायक होगी।
-
- मखाना प्रसंस्करण उद्योग को और अधिक सशक्त बनाने के लिए इसे आयुर्वेद के साथ जोड़ा जाएगा। इससे मखाना के औषधीय गुणों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी और इसका बाजार और भी विस्तृत होगा।