पटना: बिहार सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल करते हुए आज “बिहार नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति–2025” को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। यह नई नीति राज्य को न सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी, बल्कि इसे देशभर में हरित विकास का पथप्रदर्शक भी बनाएगी। यह कदम भारत सरकार द्वारा तय किए गए नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी एक ठोस योगदान साबित होगा।
इस नई नीति को वर्ष 2017 में लागू हुई पूर्व ऊर्जा नीति की अवधि पूरी होने के बाद तैयार किया गया है और यह आगामी पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। नीति का उद्देश्य है – बिहार में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देना, ऊर्जा मांग को पूरा करना, राज्य में निवेश को आकर्षित करना और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना।
बिहार में ऊर्जा क्रांति की आधारशिला
नई नीति में 43.33% रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन की पूर्ति को प्राथमिकता दी गई है, जिसे केंद्रीय विद्युत मंत्रालय, बिहार विद्युत विनियामक आयोग और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने तय किया है। साथ ही 'एडेक्वेसी प्लान फॉर बिहार' के अनुसार राज्य की भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।
नीति में स्टांप शुल्क में छूट, भूमि रूपांतरण शुल्क माफी, बिजली शुल्क रियायत, ट्रांसमिशन और व्हीलिंग चार्ज में कटौती, हरित टैरिफ, फीड-इन टैरिफ, ऊर्जा बैंकिंग, एसजीएसटी छूट, कार्बन मूल्य निर्धारण जैसे निवेश-अनुकूल प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों में परियोजनाओं की स्थापना को सरल और लाभकारी बनाना है।
हरित ऊर्जा के लिए बड़ा लक्ष्य
इस नीति के तहत बिहार सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में 23,968 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता और 6.1 गीगावाट घंटे ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाए। इसमें उन्नत तकनीकों जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, जियो थर्मल एनर्जी, पंप स्टोरेज, और ग्रिड लेवल बैटरी स्टोरेज को भी नीति में शामिल किया गया है। यह संकेत है कि राज्य सिर्फ सौर या पवन ऊर्जा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भविष्य केंद्रित और नवाचार-आधारित मॉडल अपनाना चाहता है।
एकल विंडो प्रणाली और निवेशकों के लिए सुविधाएं
सरकार ने एकल विंडो सिस्टम लागू करने की घोषणा की है, जिससे परियोजना स्वीकृति, आवश्यक अनुमतियों और कनेक्टिविटी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सकेगा। ऊर्जा बैंकिंग, ओपन एक्सेस और ग्रीन टैरिफ जैसे विकल्पों से निजी निवेश को काफी बल मिलेगा। साथ ही, इस नीति में ग्रिड कनेक्टिविटी और आधारभूत संरचना विकास में विशेष छूट प्रदान की जाएगी।
ऊर्जा मंत्री का दृष्टिकोण
ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह नीति बिहार को हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा प्रणाली की ओर ले जाने वाली आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और भावी पीढ़ियों की भलाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार हरित ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।
ब्रेडा और अन्य हितधारकों की भूमिका
इस नीति को तैयार करने की जिम्मेदारी बिहार रिन्यूएबल डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) को सौंपी गई थी। नीति को व्यवहारिक और नवाचारपरक बनाने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे अग्रणी राज्यों की ऊर्जा नीतियों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। नीति निर्माण के दौरान विभिन्न विभागों, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से भी सलाह ली गई।
राज्य सरकार के निर्देश पर ब्रेडा अब इस नीति के तहत रिन्यूएबल एनर्जी जोन, हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स, और कैम्पस मॉडल जैसी परियोजनाओं को लागू करने के लिए पंजीकृत कंपनियों और एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा।
ऊर्जा सचिव की टिप्पणी
ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यह नीति बिहार को सस्ती, स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा व्यवस्था की ओर ले जाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा भविष्य की ओर यह राज्य का एक निर्णायक कदम है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में बिहार को नई पहचान मिलेगी।
बिहार नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति–2025 के ज़रिए राज्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह न सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी प्राथमिकता दे रहा है। यह नीति न केवल आज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्जवल और हरित भविष्य की नींव रखने वाला एक ऐतिहासिक फैसला है।
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