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पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को बताया कि फ्रांस में ‘बिहार फाउंडेशन’ का एक नया चैप्टर स्थापित किया गया है। यह पहल न सिर्फ प्रवासी बिहारियों को संगठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे बिहार के बहुआयामी विकास को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया आयाम भी मिलने वाला है। फ्रांस में बसे बिहार मूल के लोगों के सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, पर्यटन और संस्कृति जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई रफ्तार देने की योजना बनाई गई है।

फ्रांस में ‘बिहार स्पंदन’ की अहम भूमिका
श्री चौधरी ने बताया कि फ्रांस में लंबे समय से कार्यरत ‘बिहार स्पंदन’ नामक संगठन पहले से ही सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। यह संस्था छठ, होली और दीपावली जैसे त्योहारों को फ्रांस की धरती पर पूरी धूमधाम से मनाती है। साथ ही निवेश से जुड़े फोरम्स और इवेंट्स में भी भाग लेकर बिहार की संभावनाओं को वैश्विक मंचों पर पहुंचाने का कार्य करती है।

16 प्रवासी बिहारियों ने कराया पंजीकरण
बिहार फाउंडेशन के फ्रांस चैप्टर के तहत अब तक 16 प्रवासी बिहारियों का पंजीकरण फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर किया जा चुका है। श्री चौधरी ने कहा कि यह शुरुआत छोटी जरूर है, लेकिन इसका प्रभाव बड़ा होगा। यह पहल बिहार सरकार की 'प्रवासी जुड़ाव नीति' और वैश्विक साझेदारी के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है।

पूर्वोत्तर भारत से जुड़ाव की दिशा में भी पहल
फ्रांस के साथ-साथ, सम्राट चौधरी ने यह भी बताया कि देश के पूर्वोत्तर हिस्से में शिलांग में भी बिहार फाउंडेशन के एक नए चैप्टर के गठन पर सहमति बनी है। इसका मकसद शिलांग में रह रहे बिहार मूल के छात्र, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और सांस्कृतिक कार्यकर्ता को एक साझा मंच प्रदान करना है। यह मंच उन्हें अपने गृह राज्य बिहार से जुड़े विकास कार्यों और सांस्कृतिक आयोजनों में योगदान देने का अवसर देगा।

वैश्विक बिहार: एक नए युग की शुरुआत
बिहार फाउंडेशन का यह अंतरराष्ट्रीय विस्तार, खासकर यूरोप के विकसित देश फ्रांस में, राज्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह पहल यह दर्शाती है कि बिहार अब केवल सीमित भौगोलिक दायरे में सिमटा नहीं है, बल्कि ग्लोबल बिहार की अवधारणा को हकीकत में बदलने के लिए प्रयासरत है।

यह नया चैप्टर प्रवासी बिहारियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने, राज्य में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने तथा सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का बेहतरीन जरिया बनेगा।