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Uttarakhand: चीन सीमा क्षेत्र में अब उत्तराखंड के भेड़ पालक भी जा सकेंगे। जोशीमठ प्रशासन ने इसकी अनुमति दे दी है। अब वह चीन सीमा के इलाके में भी अपनी भेड़ें व बकरियां चराने जा सकते हैं। इसी वजह से अब चरवाहे उन ऊंचे इलाकों में भी पहुंच रहे हैं। जहां अब तक उनको जाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे 209 भेड़ पालने वालों को इसकी अनुमति मिली है। आपको यह भी बता दें कि हर भेड़ पालने वाले करीबन एक हजार बकरियों व भेड़ों को चराते हैं।

तीन महीने तक बढी ठंड की वजह से आते हैं निचले इलाकों में

दरअसल, चीन सीमा के इलाके में तीन महीने तक ठंड काफी बढ जाती है। इसीलिए चरवाहे अपने मवेशियों के साथ निचले इलाकों में आ जाते हैं। अकेले चमोली जनपद में 96861 बकरियां और 75417 भेड़ हैं। यह चरवाहे हर साल ऊंचे इलाकों में अपने मवेशियों को चराने जाते हैं। प्रशासन ने उन्हें इसकी अनुमति लेनी होती है।

अब तक 209 को अनुमति

कुमकुम जोशी, एसडीएम, जोशीमठ के मुताबिक अभी तक 209 चरवाहों को सीमा क्षेत्र में जाने की अनुमति दी गई है। भेड़-बकरियों के साथ जून से सितंबर माह तक चरवाहे टेंट लगाकर रहते हैं। खाने-पीने का सामान भी चरवाहे साथ लेकर जाते हैं। जब अक्तूबर माह के दूसरे सप्ताह तक ठंड बढ जाती है तो वह चरवाहे निचले क्षेत्रों में चले आते हैं।

चरवाहे सेना के लिए भी होते हैं सहायक

चरवाहे मवेशियों के साथ चीन सीमा क्षेत्र तक आते जाते रहते हैं। भारतीय सेना के लिए एक तरह से यह सहायक साबित होते हैं। आपको बता दें कि एक बार वर्ष 2015 में बाड़ाहोती क्षेत्र में में घुसे चीनी सैनिकों ने चरवाहों को भगा दिया था। उस समय चीनी सैनिकों ने चरवाहों का खाद्यान्न नष्ट कर दिया था। इसके बावजूद चरवाहे चीनी सैनिकों से डरे नहीं। और हर साल अपनी भेड़ें चराने उस इलाके में जाते हैं।

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