सरकार के मुंह लगे अफसर का लोकतंत्र पर दूसरा हमला

सरकार के मुंह लगे अफसर का लोकतंत्र पर दूसरा हमला

लखनऊ (गिरीश कुशवाहा)।  लखनऊ जनवरी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरीश चंद कुशवाहा ने भारत सरकार के प्रधानमंत्री एवं उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यपाल को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि जब जब नवनीत सहगल जैसा चर्चित अफसर सूचना विभाग का प्रमुख सचिव एवं अपर मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहा तब तब सरकारों का पतन हुआ।

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पहले बसपा के कार्यकाल में सूचना प्रमुख सचिव रहे तो बहुजन समाज पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश के पत्रकारों का कोपभाजन बना और बहुजन समाज पार्टी की सरकार उखड़ गई जिसको लेकर समाजवादी पार्टी ने उपरोक्त अफसर को 2 साल तक चार्ज नहीं दिया परंतु सपा मुखिया की गणेश परिक्रमा करके मुख्य सचिव सूचना का पद हथिया लिया जिसका परिणाम यह हुआ सपा की सरकार पत्रकारों का कोई भजन बनी और 2012 में सरकार सपा की चली गई जिसको लेकर भाजपा ने गंभीरता से मंथन करते हुए 4 वर्ष तक चर्चित अफसर नवनीत सहगल को अपर मुख्य सचिव सूचना के पद पर नहीं बिठाया परंतु संघ की परिक्रमा करने के बाद उपरोक्त चर्चित भ्रष्ट अफसर अपर मुख्य सचिव सूचना के पद पर आसीन हो गया।  जिसका परिणाम यह हुआ सबसे पहले मान्यता प्राप्त पत्रकारों के सैकड़ों आवासों की पत्रावली को निरस्त कर दिया।

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इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के बाहर के एवं कुछ तथाकथित मूह लगे समाचार पत्रों को खुश करने के लिए ऑन लिमिटेड विज्ञापन जारी कर दिए। चर्चा तो यहां तक है की चर्चित उपरोक्त अफसर उत्तर प्रदेश के पत्रकारों से मिलना बंद कर दिया और लोक भवन में विभाग में ना बैठ कर इधर उधर भटक कर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।

इतना ही नहीं आचार संहिता लगते लगते भाजपा सरकार को दफन करने की रणनीति बनाते हुए उपरोक्त अफसर ने सचिवालय पास जारी करने के लिए 2006 की भाती उपरोक्त अवसर नई नियमावली लागू कर दी। जिसमें कहा 25,000 से 100000 तक के समाचार पत्र को केवल सचिवालय पास निर्गत किया जाएगा। ऐसे पत्रकार लोक भवन नहीं जा पाएंगे जिनका प्रसार 1 लाख से 2 लाख है वह लोग लोक भवन तक जा पाएंगे।

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नई नियमावली आने पर उत्तर प्रदेश के पत्रकारों में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि भारत सरकार के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री एवं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने उपरोक्त प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया तो उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के कोप भाजन की सरकार 2022 के चुनाव में बनने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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उपरोक्त प्रकरण को लेकर प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने उपरोक्त स्थानों पर रजिस्टर्ड पत्र भेजकर पत्र पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने अनुरोध एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरीश चंद कुशवाहा ने यह भी कहा यदि केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने पत्र को गंभीरता से नहीं लिया तो एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के हजारों पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा कर न्याय की मांग करेंगे।