Deputy CM UP Keshav Prasad Maurya के विभाग में इस तकनीक से हो रही सड़कों की मरम्मत, पैसे और समय की होती है बचत

Deputy CM UP Keshav Prasad Maurya के विभाग में इस तकनीक से हो रही सड़कों की मरम्मत, पैसे और समय की होती है बचत

Deputy CM UP Keshav Prasad Maurya News: यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या (Deputy CM UP) (Keshav Prasad Maurya) के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में सड़कों की मरम्मत के लिए एक नयी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें समय कम लगता है और कार्बन उत्सर्जन की संभावना भी कम होती है। प्रदेश में पिछले वर्ष इस तकनीक से काम के लिए नौ मार्गों का चयन किया गया था। जिनमें से ज्यादातर पर काम पूरा हो गया है।

क्या है य​ह टेक्नोलाजी?

आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर यह तकनीक क्या है। इस टेक्नोलाजी में सीमेंट में एक विशेष तरह का रसायन मिलाया जाता है। इसकी एक पर्त बिछायी जाती है। पुरानी सड़क की एक विशेष मशीन से खुदाई होती है। उस खुदाई में निकले गिटटी और पत्थर का उपयोग उस सड़क की मरम्मत में किया जाता है। इसके लिए अलग से सामग्री खरीद की जरूरत नहीं होती है। इस तकनीक को एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) कहते हैं।

क्या कहते हैं चीफ इंजीनियर?

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर वीरपाल सिंह कहते हैं सड़कों के निर्माण क्षेत्र में यह तकनीक नई क्रांति साबित होगी। वैसे सड़कों को बनाने में लगी बड़ी बड़ी एजेंसियां अब तक इस तकनीक का प्रयोग नहीं करती हैं। विभाग ने इस नयी टेक्नोलाजी पर काम शुरू किया है।

क्या होगा फायदा?

परंपरागत तरीके से बनाई गई सड़कों से अधिक टिकाऊ होंगी सड़कें

निर्माण लागत में आएगी कमी

कार्बन उत्सर्जन में कमी से पर्यावरण को फायदा

कम समय में हो जाता है सड़कों का निर्माण

इस वर्ष विभाग इसी तकनीक से करेगा 5500 किमी कार्य

विभाग में लगभग पांच हजार करोड़ से अधिक के काम इसी टेक्नोलाजी से होंगे।

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