ये मोटिवेशनल स्टोरी पढकर आप जीवन में संतुलन बनाना सीख लेंगे

ये मोटिवेशनल स्टोरी पढकर आप जीवन में संतुलन बनाना सीख लेंगे

Motivational Story In Hindi For Student: आज हम आपको एक ऐसी मोटिवेशनल स्टोरी से रूबरू कराने जा रहे हैं। जिसको पढकर आपके अंदर का इंसान खुद को कमजोर महसूस नहीं करेगा, बल्कि उसका जोश हाई हो जाएगा। जीवन में सामने आ रही विपरीत परिस्थितियों में भी वह संतुलन बनाना सीख लेगा।

एक मेंढक की मोटिवेशनल स्टोरी (Motivational Story In Hindi For Student)

एक अध्यापक अपने क्लास के छात्रों को जीवन में संतुलन बनाने के लिए एक बड़ी सीख देना चाहते थे। उन्होंने एक दिन सभी छात्रों को बुलाया और पास ही रखे एक छोटे से जार में एक पानी भरा और पानी भरने के बाद उस जार में एक मेंढक डाल दिया। फिर जार को जल रही आग के उपर रख दिया।

जार के सामान्य पानी में मेंढक खेलने लगा (Motivational Story In Hindi For Student)

यह देखकर बच्चे अचंभित थे कि मास्टर साहब क्या बताना चाह रहे हैं। जब जार में पानी बिल्कुल सामान्य था, तब मेंढक आराम से जार में खेल रहा था। पर जब जार का पानी धीरे धीरे गर्म होने लगा तो भी मेंढक पानी में ही टिका रहा।

पानी गर्म होता रहा, मेंढक टेम्प्रेचर एडजस्ट करता रहा (Motivational Story In Hindi For Student)

मास्टर साहब ने बच्चों को बताया कि जार का पानी जैसे जैसे गर्म हो रहा है। मेंढक गर्म पानी के तापमान के मुताबिक अपने शरीर का तापमान भी एडजस्ट कर ले रहा है। इसकी वजह से उसे कोई दिक्कत नहीं हो रही है और वह आराम से जार में पड़ा हुआ है।

पानी ज्यादा गर्म होने पर भी सिर्फ एडजस्ट (Motivational Story In Hindi For Student)

फिर जब जार का पानी ज्यादा गर्म होने लगा तो भी मेंढक उस पानी के टेम्प्रेचर के मुताबिक अपने शरीर का तापमान एडजस्ट कर लेता है और आराम से पानी में पड़ा रहता है। उसके उपर कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसी तरह कुछ देर बाद आग पर रखा पानी और ज्यादा गर्म हो जाता है।

…इसलिए उबलते पानी से नहीं निकल सका मेंढक

जब पानी उबलने लगता है, तब मेंढक अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने की कोशिश करता है। पर जार के अंदर कहीं भी गर्म पानी से छिपने की सु​रक्षित जगह नहीं थी। तब वह उबलते पानी गर्म पानी से छलांग मारने की कोशिश करता है। पर उसकी कोशिश सफल नहीं होती है और जार के उबलते हुए पानी में ही उसकी मौत हो जाती है।

टीचर ने बच्चों को दी यह सीख

इसके​ बाद मास्टर साहब बच्चों से पूछते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम से आप लोगों ने क्या सीखा? फिर बच्चों को समझाते हुए बताया कि यदि मेंढक जब पानी पहली बार थोड़ा गरम हुआ, उस समय छलांग मारकर पानी से बाहर आ सकता था। पर उसने उस समय ऐसा नहीं किया, पानी गर्म होता रहा और वह पानी का तापमान अपने शरीर से एडजस्ट करता रहा। यदि वह पहले ही जार से छलांग लगा देता तो वह जार से बाहर आ सकता था।

…मेंढक क्यों खो देता है अपनी इनर्जी

पर वह पहले ही अपनी सारी इनर्जी जार के गर्म पानी से अपने शरीर के टेम्प्रेचर को एडजस्ट करने में खो देता है। इसकी वजह से वह अंत में उबलते पानी से छलांग नहीं लगा पाता, क्योंकि उसकी ज्यादा ऊर्जा एडजस्ट में ही खर्च हो चुकी होती है।

परिस्थितियों से एडजस्ट करने में खर्चते हैं इनर्जी (Motivational Story In Hindi For Student)

इसी तरह हम अपने जीवन में तमाम तरह की परिस्थितियों का सामना करते हैं। पर उन परिस्थितियों से एडजस्ट करने में ही अपनी पूरी इनर्जी खर्च कर देते हैं। यदि हम परिस्थितियों से एडजस्ट करने के बजाए पहले ही छलांग लगा दें तो उन परिस्थितियों से बाहर आ सकते हैं। परिस्थितियों से एडजस्ट करने के चक्कर में हम अपनी सारी इनर्जी गवां देते हैं और अंत में जब अनेक प्रकार की परिस्थितियों के बीच घिर जाते हैं, तब फिर उन स्थितियों से बाहर नहीं निकल पाते हैं।

सभी के जीवन की यही कहानी

टीचर ने बच्चों से कहा कि यह कहानी सिर्फ इस मेंढक की नहीं है, बल्कि सभी के जीवन की कहानी इसी के इर्द गिर्द ही घूमती रहती है। जैसे एक स्टूडेंट सोचता है कि चलो कल पढ लेंगे…या यह काम कल पूरा कर लेंगे…ऐसा करते करते उसकी मानसिकता ही टालू वाली हो जाती है और वह उसकी हैबिट बन जाती है और एक गलत आदत व्यक्ति को जीवन में काफी पीछे ले जाती है। स्टूडेंट जब अंत में विषम स्थितियों से घिर जाता है तो सर पर हाथ रखकर सोचता है कि काश ऐसा पहले कर लिया होता। समय पर छलांग लगा दी होती तो ऐसा नहीं होता।

निष्कर्ष:—व्यक्ति के जीवन में अच्छी बुरी परिस्थितियां आती रहती है। पर इसका मतलब यह नहीं है कि उनसे समझौत करते हुए जीवन जीया जाए। आपको भाग्य का भरोसा छोड़कर छलांग लगानी ही होगी। आप अपने आस पास देखेंगे तो ऐसे तमाम लोग आपको मिल जाएंगे जो भाग्य को रोना रोते हुए कहते हैं…किस्मत में यही लिखा है तो क्या करें…वह छलांग लगाना नहीं चाहते हैं। वह अपने कम्फर्ट जोन से पूरे जीवन भर बाहर ही नहीं निकल पाते हैं और उनका यह कम्फर्ट जोन समझौतों से भरा हुए एक कमजोर छाते की तरह होता है, गर्मी हो या बरसात राहत नहीं देता है, हां हमें कामचलाऊं व्यवस्था का एहसास जरूर कराता है। अफसोस की बात यह है कि ज्यादातर लोग दुख में ही अपना पूरा जीवन काट देते हैं। पर वह अपनी पहली छलांग ही नहीं लगाते हैं।

खुद के खत्म होने का इंतजार मत करिए

इस कहानी की सीख यह है कि कोई देवदूत या अदृश्य ताकत आपके आंसू पोंछने नहीं आएगी। आपको खुद अपने आंसू पोंछकर आगे बढना होगा। खुद आप ही अपनी मदद कर सकते हैं। खुद को इस तरह खत्म मत होने दीजिए। समय पर छलांग लगाइए और मंजिल की तरफ बढिए।

कृपया ध्यान दें:—आशा करता हूं कि आपके लिए यह कहानी उपयोगी साबित होगी। कृपया आप नीचे कमेंट बाक्स में जाइए और इस कहानी के बारे में जरूर अपने विचार लिखिए। या फिर यदि आप अन्य किसी विषय पर कुछ जानकारी चाहते हैं तो उसका भी उल्लेख कर सकते हैं और अपनी ईमेल आईडी भी उपलब्ध करा सकते हैं। ताकि समय समय पर आपको चुनिंदा सामग्री उपलब्ध करायी जा सके।

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