माता सती भी नहीं जान पायी भगवान की लीला—प्रणव पुरी

माता सती भी नहीं जान पायी भगवान की लीला—प्रणव पुरी

रायबरेली (इम्तियाज अहमद खान)। स्वामी सत्यमित्रानन्द डिग्री कालेज में आयोजित रामकथा के पहले दिन महाकाल की नगरी उज्जैन से पधारे स्वामी अंगद जी महाराज के उत्तराधिकारी स्वामी प्रणव पुरी ने माता सती के मोह के प्रकरण पर प्रकाश डालते हुए कहाकि वास्तविकता में यह प्रकरण भगवान शिव के मोह की कथा है।

उन्होंने कहाकि जब देवाधिदेव भगवान महादेव ने जब प्रभु श्रीराम को रोते हुए देखा तो उन्होंने भगवान राम की जय-जयकार तो की परन्तु उन्होंने जान-बूझकर उन्हें दण्डवत प्रणाम किया। भगवान शंकर को ऐसा लगा कि यदि वे प्रभु श्रीराम के सामने जाते हैं तो कहीं ऐसा न हो कि भगवान राम की लीला का रहस्य खुल न जाये। इसी ऊहापोह में भगवान शंकर ने भगवान राम से भेंट नहीं की। भगवान की माया का ऐसा प्रभाव है कि सांसारिक लोग भगवान की लीलाओं को तो समझ ही नहीं सकते। माता सती भी भगवान राम की लीला को नहीं जान पायी। आचायर् प्रणव पुरी ने कहाकि वैधानिक रूप से कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को केवल दो कारणों से त्याग सकता है। एक तो वह मानसिक रूप से स्वस्थ न हो और दूसरे पत्नी का चरित्र ठीक न हो। परन्तु हमारी सनातन परम्परा में पति और पत्नी के परस्पर सम्बन्ध विच्छेद हो ही नहीं सकते।

यही कारण है कि हमारी संस्कृति में तलाक या तलाक जैसे अथर् का कोई अन्य शब्द ही नहीं है। स्वामी अंगद जी की भांति ही स्वामी प्रणव पुरी जी भी कथाकाल के पूरे तीन घंटे खड़े रहकर ही रामकथा गायन करते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबंधक राजेन्द्र बाजपेयी, विमलेश अवस्थी, अचर्ना मिश्रा, एडवोकेट नागेश कुमार सिंह आदि की उपस्थित रही।