प्रिंट, डिजिटल और टीवी चैनल में मनीष यादव का नाम बना एक मिसाल

प्रिंट, डिजिटल और टीवी चैनल में मनीष यादव का नाम बना एक मिसाल
डॉ मोहम्मद कामरान
स्वतंत्र पत्रकार
हां! मैं एक यादव हूँ ।
सरकार का मुखपत्र नहीं, पत्रकार हूँ।
संवेदना लिखता हूँ, ख़बरों के चलते ही मैं जीता हूँ।
डरता नहीं धमकियों से, बेबाक पत्रकारिता करता हूँ ।

आज के बदलते इंडिया (न्यू इंडिया) में एक नए युग की शुरुआत हुई है जहां जातिसूचक शब्दों के आधार पर इंसान की प्रतिभाओं को आंकलन करने का काम शुरू हुआ है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिले गाजीपुर से जब एक किसान परिवार का बेटा खबरों की दुनिया और समाचार पत्रों की वास्तविकता और सत्यता को अपने कलम से निखारने निकल पड़ता है तो उसे पीठ पर शाबाशी और मार्ग प्रशस्त करने वाला तो कोई नहीं दिखता लेकिन कानों में व्यंग्यात्मक लहज़ा हर कोने से जरूर सुनाई देता है कि वो तो यादव है, खबरों को लिखने और पढ़ने का काम यादवों के बस का नही और जगहंसाई का पात्र सिर्फ इस कारण से बनाया गया कि वो यादव है, परंतु इस यादव में कुछ अलग ही था, ये मानुष अपनी ही धुन का पक्का था और अपने मनीष नामानुसार अपने मन का भगवान था।

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मनीष यादव अपनी आलोचनाओं से डरा नही, डिगा नही बल्कि इन्ही आलोचनाओं को अपनी जिंदगी का मूल मंत्र और तंत्र बनाकर ये ठान लिया कि कुछ कर दिखाना है, खबरों की दुनिया मे यादव का नाम चमकाना है और समाचार जगत में ही अपना एक नया मुकाम बनाना है, एक नई मंज़िल बनानी है और उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में खबरों की सत्यता से बिना समझौता किए आम जनमानस की आवाज, समस्याओं को अपने अंदाज में खबरों की दुनिया मे लाना है, साथ ही दुनिया को ये भी दिखाना है कि यादव हूं, लेकिन काबिल भी हूं और खबरों की दुनिया में बिना समझौता किए हुए कुछ नही, बहुत कुछ कर सकता हूँ।

आलोचनाओं को अपनी ज़िंदगी का मक़सद बनाकर मनीष यादव ने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया यानी समाचार पत्रों के माध्यम से अपनी लेखनी के ओजस्वी अल्फाजों से एक नया आयाम दिया जिसके चलते राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार की पदवी से नवाज़े भी गए लेकिन सीमित दायरों और सीमित पाठकों से बहुत आगे निकलने की क्रांतिकारी सोच ने डिजिटल मीडिया के एक ऐसे प्लेटफार्म की शुरुआत हुई जिसने मात्र 365 दिनों में उत्तर प्रदेश के न्यूज़ पोर्टलों की दुनिया में एक नया कीर्तिमान बना दिया और लाखों करोड़ों लोग प्रतिमाह मनीष की खबरों के संग पोर्टल से जुड़ गए। खबरों की विश्वसनीयता पर डेलीहंट और गूगल एडसेंस ने अपनी मोहर लगा कर देश के 1000 न्यूज़ पोर्टल की श्रेणी में यादवजी के इस पोर्टल को स्थापित कर दिया।

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द यूपी एक्सप्रेस नाम के पोर्टल की रफ्तार एक्सप्रेस वे की तरह गति पकड़ चुकी थी और यादव परिवार के एक अन्य सदस्य जो ज़िंदगी की दौड़ में बराबर की हक़दार थी अब इस पोर्टल की बागडौर उन्होंने अपने हाथों में संभाल ली थी। ज़िंदगी मे जिनका साथ हमेशा था, खबरों की दुनिया मे साथ मिलने से मनीष नाम का मानुष अब रुकने वाला कहाँ था। निगाहें तो दुनिया के बाहर अंतरिक्ष में घूम रहे सेटेलाइट पर केंद्रित थी जिनके लिए झोला उठाकर देश की राजधानी दिल्ली के करीब नोएडा पहुंचना था जहां लगभग सारे न्यूज़ चैनलों का ठिकाना था।

एक्सप्रेसवे की रफ्तार से एलेक्ट्रॉनिक सिटी नोएडा पहुँचना आसान था लेकिन 6 महीने के अल्पसमय में नोएडा में जिस कार्य को अंजाम दिया गया जिसने भी सुना नामुमकिन बताया, रात दिन की मेहनत नही तपस्या और लगन से मनीष ने असंभव को संभव कर दिखाया, न सिर्फ न्यूज़ चैनल स्थापित किया बल्कि खबरों से बिना समझौता किए हुए सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार की मदद के साथ इस न्यूज़ चैनल का संचालन और प्रसारण भी संभव कर दिखाया।

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रुकावटें बाधाएं स्वाभाविक रूप से आती ही हैं और उनसे लड़ा भी जा सकता है परंतु यहां तो बाधाएं सिर्फ इसलिए उत्पन्न की गई कि खबरों की दुनिया में कही यादव का नाम न हो जाए लेकिन मनीष यादव ने इन सभी बाधाओं को अपनी मेहनत और व्यवहारकुशलता से दूर कर एक बड़ी मिसाल क़ायम कर पूरे समाज, देश को, न्यू इंडिया के बदलते परिवेश में जातिसूचक टिप्पणीयां करने वालो को आईना दिखाते हुए संदेश दिया है कि यादव हूं, लेकिन खबरों की दुनिया में बिना समझौता किए हुए बहुत कुछ कर सकता हूं। ऊर्जावान, ओजस्वी, बहुआयामी, साहसी, महत्वाकांशी व्यक्तित्व के हमारे मित्र भाई मनीष यादव जी एवं C10 News Channel की पूरी ऊर्जावान टीम को बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं ।