क्या यूपी विधानपरिषद में नेता विरोधी दल का दर्जा समाप्त करना असंवैधानिक है? जानिए क्या कहा सपा नेता लाल बिहारी यादव ने

क्या यूपी विधानपरिषद में नेता विरोधी दल का दर्जा समाप्त करना असंवैधानिक है? जानिए क्या कहा सपा नेता लाल बिहारी यादव ने

लखनऊ। यूपी विधानपरिषद में समाजवादी पार्टी नेता लाल बिहारी यादव का नेता विरोधी दल का दर्जा समाप्त कर दिया गया है। सपा नेता लाल बिहारी यादव ने इस सिलसिले में एक प्रेस रिलीज जारी कर अपना पक्ष रखा है और कहा है कि सभापति द्वारा नेता विरोधी दल की मान्यता समाप्त करना गैर कानूनी और असंवैधानिक है। अपने तर्क में उन्होंने नियमावली की एक तस्वीर भी शेयर की है, जो उपर दी गयी है।

इस नियम का विरोधी दल से कोई सरोकार नहीं

उन्होंने कहा है कि सभापति ने विधान परिषद की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली
1956 के नियम-234 का उल्लेख करते हुए नेता विरोधी दल की मान्यता को समाप्त करने की जो अधिसूचना जारी की है, वह गणपूर्ति संख्या-10 सदन के संचालन के लिए है। नेता विरोधी दल की मान्यता समाप्त करने के लिए नहीं है। जब कि नियम-234 विधान परिषद की कार्यवाही के संचालन हेतु है। इस नियम का नेता विरोधी दल से कोई सरोकार नहीं है।

विधान परिषद में समाजवादी पार्टी विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी

उनका कहना है कि विधान परिषद में समाजवादी पार्टी विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी है। समाजवादी पार्टी विधान मण्डल दल के नेता अखिलेश यादव ने सभापति को 26 मई को पत्र भेजकर
लाल बिहारी यादव को नेता विरोधी दल नामित करने के लिए संस्तुति किया था। उसी पत्र के
आधार पर विधान परिषद सभापति ने नेता विरोधी दल के रूप में मान्यता प्रदान की थी।

लेकिन नियमों का गलत हवाला देकर नेता विरोधी दल की मान्यता की समाप्त

लाल बिहारी यादव ने कहा कि 7 जुलाई को अधिसूचना जारी कर नेता विरोधी दल की मान्यता समाप्त कर दी गयी। नेता विरोधी दल सदन में सम्पूर्ण विपक्ष का नेता होता है। समाजवादी पार्टी बड़ी पार्टी है लेकिन नियमों का गलत हवाला देकर नेता विरोधी दल की मान्यता समाप्त करना लोकतंत्र को कमजोर एवं कलंकित करने वाला कदम है। यह सदन में विपक्ष की आवाज दबाने और कमजोर करने की साजिश है। सभापति जी का यह फैसला लोकतंत्र की हत्या और नियम कानूनों की धज्जियां उडाने वाला जैसा प्रतीत होता है।

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