2018 में भी ग्रहण से पहले आया था भूकंप, जानिए Eclipse and Earthquak के बीच क्या है कनेक्शन?

2018 में भी ग्रहण से पहले आया था भूकंप, जानिए Eclipse and Earthquak के बीच क्या है कनेक्शन?

Earthquak in UP: देश में आठ नवम्बर को साल का लास्ट चंद्रग्रहण पड़ा। उसके बाद सिलसिलेवार दो बार लगातार भूकंप के झटके आएं। लोग घबराकर घरों से बाहर भागें। ठीक ऐसा ही भूकम्प वर्ष 31 जनवरी, 2018 में चंद्रग्रहण के ठीक पहले आया था। उस समय दिल्ली के अलावा देश के कई हिस्सों में भूकम्प के झटके महसूस किए गए थे। जनवरी 2018 में आए भूकम्प की तीव्रता भी रिक्टर स्केल पर 6.1 दर्ज की गयी थी। ऐसे में यह चर्चा चल पड़ी है कि क्या चंद्रग्रहण और भूकम्प के बीच कोई कनेक्शन है। आइए जानते हैं इस बारे में ज्योतिषियों व विशेषज्ञों की क्या राय है।

ग्रहण योग इस तरह के देता है संकेत

ज्योतिषियों का इस तरह की घटना पर प्राचीन गणितज्ञ वराह मिहिर की व्यापक संहिता का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि उसके अनुसार, भूकम्प की कुछ वजहे होती हैं, जो हमें इस बात के संकेत देती हैं। उन्हीं संकेतों में से ग्रहण योग भी एक है। जब पृथ्वी, सूर्य व चंद्रमा के बीच आती है, तब चंद्र ग्रहण तब पड़ता है। और जब चंद्रमा, सूर्य व पृथ्वी के बीच आता है। तब सूर्य ग्रहण पड़ता है। मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि जब भी कोई ग्रहण पड़ता है या पड़ने वाला होता है, तो वह Earthquak के 40 दिन पूर्व अथवा 40 दिन बाद पड़ता है। मतलब उन 80 दिनों के बीच Earthquak कभी भी आ सकता है। यह अवधि घट और बढ भी सकती है, और भूकंप 15 दिन पहले अथवा 15 दिन बाद आते हैं।

विज्ञान क्या कहता है?

वहीं विज्ञान के मुताबिक टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से भूकंप व सुनामी आती है, तो ज्योतिष कहता है कि ग्रहों के प्रभाव से टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में घर्षण करते हैं और गति करते हैं। यह घर्षण और गति ही कंपन पैदा करता है और भूकंप की वजह बनता है। ऐसा भी कहा जाता है कि भूकंप की तीव्रता, प्लेटों पर ग्रहों के प्रभाव पर भी निर्भर करती है।

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