Current Global Economic Crisis : वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बजी खतरे की घंटी, ये है वजह?

Current Global Economic Crisis :  वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बजी खतरे की घंटी, ये है वजह?

Current Global Economic Crisis : वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बार फिर खतरे की घंटी बजने लगी है। इसकी वजह लंदन इंटर बैंक ओवरनाइट रेट (एलआईबीओआर) और यूएस ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप्स (ओआईएस) के बीच लगातार बढ रहा अंतर है। मौजूदा समय में इन दोनों के बीच का अंतर बढकर 40 बेसिस पॉइंट्स पर पहुंच गया है। इससे मंदी के संकेत मिलते हैं।

क्या है एलआईबीओआर बेंचमार्क ?

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर लंदन इंटर बैंक ओवरनाइट रेट (एलआईबीओआर) बेंचमार्क क्या है? दरअसल, इसका यूज दुनिया भर के बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (Current Global Economic Crisis ) करती है। इस बेंचमार्क का इस्तेमाल वह लोन पर ब्याज दर तय करने में करते हैं। दुनियाभर में यूज किए जा रहे क्रेडिट कार्ड और बड़ी कंपनियों को मिलने वाले लोन की ब्याज एलआईबीओआर के माध्यम से ही तय की जाती है।

क्या है ओआईएस? (Current Global Economic Crisis )

वित्तीय संस्थान ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप्स (ओआईएस) का यूज ब्याज दरों से जुड़े जोखिम की हेजिंग करने में करते हैं। यह अमेरिकी इकानमी की पॉलिसी रेट से जुड़ा होता है। दरअसल, अमेरिका में पालिसी रेट, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को ही कहा जाता है।

एलआईबीओआर और ओआईएस के बीच अंतर 40 बेसिस पॉइंट्स (Current Global Economic Crisis )

एलआईबीओआर और ओआईएस के बीच का अंतर बढा है। यह बढ़कर 40 बेसिस पॉइंट्स तक गया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि डालर इंडेक्स पिछले बीस साल में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। दूसरे देशों की करेंसी की तुलना में डालर में तेजी है। इसकी वजह से यह अंतर बढा है।

इस वजह से भी पड़ा है फर्क

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) ने बॉन्ड मार्केट में हस्तक्षेप किया, इसकी वजह से भी एलआईबीओआर और ओआईएस के बीच अंतर बढा है। दरअसल, इंग्लैंड का बांड मार्केट में हस्तक्षेप के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि सरकारी बॉन्ड यील्ड के 2008 के आर्थिक संकट के स्तर पर पहुंच गया था।

जानकारों का क्या है कहना? (Current Global Economic Crisis )

बेसिस पॉइंट्स का फर्क लगातार बढा।
वैश्विक स्तर पर इंटर बैंक मार्केट में बैंकों को कर्ज मिलने में परेशानी।
बैंकों के बीच एक दूसरे से अधिक ब्याज दर की मांग।
ऐसा इसलिए, ताकि भविष्य में डिफॉल्ट के जोखिम को कम किया जा सके।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी क्रंच के हालात बनने का खतरा।

ये है राहत की बात 

बेसिस प्वाइंटस का फर्क अभी सिर्फ 40 बेसिस पॉइंट्स।
कोरोना काल यानि मार्च 2020 में ये फर्क 80 बेसिस प्वाइंट तक पहुंचा था।
2008 की वैश्विक मंदी के समय ये फर्क 170 बेसिस पॉइंट्स था।
फिलहाल दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा नहीं।
तुरंत वर्ष 2008 या वर्ष 2020 सी मंदी का खतरा नहीं।
40 बेसिस पॉइंट्स का अंतर भी मंदी की घंटी के समान।
जल्द सुधार नहीं हुआ,तो लगातार बढता जाएगा ये फर्क।
नतीजतन, वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के खतरे का सामना कर सकती है।

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