मोदी और योगी सरकार के भ्रष्ट अफसरों ने उत्तर प्रदेश में बनाया घोटाले का नया कीर्तिमान

मोदी और योगी सरकार के भ्रष्ट अफसरों ने उत्तर प्रदेश में बनाया घोटाले का नया कीर्तिमान

लखनऊ (डॉ मोहम्मद कामरान)। उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ा अनाज घोटाला कारित करके राज्य भण्डारण निगम के अफसरों ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को फिर से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है, भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों द्वारा 4 करोड़ से अधिक के घोटाले की पुष्टि करते हुये बताया है कि लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये की अनुमानित धनराशि के घोटाले का मामला है जो राज्य भंडारण निगम और भारतीय खाद्य निगम (उ.प्र.) के इतिहास में पहली बार हुआ है।

उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम का कार्य भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से केंद्रीय क्रय नीत के अंतर्गत क्रय किये गए खाद्यान्न का भण्डारण कराया जाना, भाण्डारित खाद्यान्न को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं में निर्गत किये जाने वाले खाद्यान्न का निर्गमन करना है लेकिन मोदी सराकर की कल्याणकारी योजनाओं का कार्य करते करते यहां के अधिकारी और कर्मचारी अपने अधिकारों और कर्तव्यों से कई कदम आगे बढ़कर अपना ही कल्याण करके भंडार किये गये खाद्यान्न को बाजार में बेचकर सिर्फ और सिर्फ अपनी जेबें भरने का ही काम करते दिखई पड़ रहे है। विगत कई वर्षों से चल रहा भ्रष्टाचार और भी गहराता जा रहा है जिसका प्रमुख कारण है कि आज तक किसी भी उच्च अधिकारी पर कोई भी गंभीर कार्रवाई न तो सरकार द्वारा की गयी और न ही किसी जांच एजेंसी द्वारा जिसके चलते विभाग में चोरी करने वालों के हौसले बढ़ते गए, परिणामस्वरुप उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के नेरी कला केंद्र पर भंडारित खाद्यान्न में 23148 बोरों का गबन कर उत्तर प्रदेश के खाद्यान्न घोटाले में एक नया कीर्तिमान बनाया है।

करोड़ों का अनाज घोटाला, गरीबों के पेट पर डाका

सीतापुर के नेरी कला केंद्र पर लगातार प्रबंध निदेशक को इस घोटाले की सूचना प्राप्त हो रही थी परंतु प्रबंध निदेशक द्वारा किसी भी शिकायत पर कोई भी गंभीर कार्रवाई नही की गई बल्कि सुनियोजित रुप से 60 हजार मैट्रिक टन के इस भंडारण गृह पर पूर्व में तैनात वरिष्ठ अधिकारी को हटाते हुये निजि अनुरोध पर मात्र 2 साल से निगम में कार्यरत प्राविधिक सहायक को केंद्र प्रभारी बनाया गया और इस कार्य के लिए निगम के सभी नियम कानून को ताक पर रख कर नेरी कला केंद्र का सम्पूर्ण प्रशासनिक अधिकार उस व्यक्ति को दिया गया जिसका निगम के सेवाकाल में मात्र 2 वर्ष का ही अनुभव था। नेरी कला केंद्र पर हुए घोटालों में जिस ट्रांसपोर्ट हैंडलिंग कंपनी को कार्य दिया गया उसका कार्यकाल माह फरवरी 2021 में समाप्त हो गया था और भारतीय खाद्य निगम द्वारा इस ट्रांसपोर्ट एजेंसी की अनेक शिकायतों को भी नजरअंदाज करके विगत 9 माह से बिना किसी कार्य विस्तार आदेश जारी किये नेरी कला केन्द्र पर हैंडलिंग एवं परिवहन का कार्य कराते हुये खाद्यान्न घोटाले को अंजाम दिया गया।

राज्य भण्डारण निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक, लखनऊ द्वारा माह जनवरी 2021 में नेरीकला केन्द्र के निरीक्षण में अनेक गम्भीर अनियमित्ताऐं पाये जाने पर नेरीकला केन्द्र के प्रभारी की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त करते हुए प्रबन्ध निदेशक भण्डारण निगम को तत्काल अवगत कराते हुए केन्द्र प्रभारी के विरूद्व कायवाही किये जाने का अनुरोध किया था परन्तु प्रबन्ध निदेशक द्वारा क्षेत्रीय प्रबन्धक की रिपोर्ट को गम्भीरता से नही लिया गया वहीं भारतीय खाद्य निगम एवं भण्डारण निगम द्वारा नेरीकला केन्द्र के भौतिक सत्यापन हेतु गठित की गयी कमेटियों द्वारा नेरी कला केंद्र के भौतिक सत्यापन में कई गोदामों में बोरियां खुली पाये जाने एवं भंडारित स्टॉक की गणना न हो पाने की शिकायत प्रबंध निदेशक से किए जाने के उपरांत भी कोई कार्यवाही नही की गयी।

उत्तर प्रदेश में इतिहास बनाते इस घोटाले के तार योगी सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ साथ कहीं ना कहीं मोदी सरकार के अधीनस्थ भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों से भी जुड़े दिखते है। भारतीय खाद्य निगम के स्थानीय अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन केंद्र पर होने वाले कार्य का सुपरविज़न किया जाता है और केंद्र पर किसी भी तरह की अनियमितता या कमी के संबंध में कठोर कार्रवाई न किया जाना इन अधिकारियों की मिलीभगत बताती है। मोदी और योगी सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता से उत्तर प्रदेश में हुए इस अनाज घोटाले ने गरीबों को दिए जा रहे हैं मुफ्त अनाज की योजना पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्योंकि राज्य भंडारण निगम के गोदामों से अनाज का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीबों में किया जाता है।

भारतीय खाद्य निगम की रिपोर्ट में नेरी डिपो में हो रहे अवरोध, अनियमितताओं के संबंध में शिकायती पत्र में राज्य भंडारण निगम की छवि धूमिल किए जाने का उल्लेख किया है, सिर्फ बात वजन की नही अनाज की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नही रही। उत्तर प्रदेश राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड के जिला प्रबंधक के पत्र दिनांक 28 सितंबर 2021 का इस संबंध में लिखा पत्र योगी सरकार को सरकारी कारगुजारियों का आईना दिखा रहा है, जिस चावल को गरीबों में वितरण कराया जाना था वो बटोरन का चावल बताया गया और मात्र 20-20 किलो की बोरियों में भरा गया चावल का रंग ही पीला बताया गया। चावल की गुणवत्ता मानक विहीन होने के दृष्टिगत जिला प्रबंधक लखीमपुर खीरी ने नेरी डिपो से पात्र गृहस्थी चावल हेतु किसी अन्य डिपो में स्थानांतरित करने हेतु अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है।

मानक विहीन बटोरन का पीला चावल गरीबो को हुआ वितरण

समाचार पत्र द्वारा इस संबंध में की गयी जांच पड़ताल से घबराकर आनन फानन में प्रबंध निदेशक द्वारा दिनांक 3 दिसंबर 2021 को कार्यालय आदेश के माध्यम से 23148 बोरे खाद्यान्न स्टॉक की कमी के चलते श्री अशोक कुमार शुक्ला, प्राविधिक सहायक, केंद्र प्रभारी को प्रथम दृष्टया उत्तरदाई मानते हुए निलंबित कर दिया एवं संपूर्ण जांच हेतु जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। अपने ही आदेश में प्रबंध निदेशक द्वारा इस तथ्य को स्वीकार किया कि माह फरवरी 2021 से नेरी कला केंद्र पर भंडारित स्टॉक अभिलेखों में अनियमितताएं, गोदामों में लूज स्टॉक एवं केंद्र पर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद होने की जानकारी उनको प्राप्त थी एवं भारतीय खाद्य निगम एवं भण्डारण निगम की संयुक्त टीम द्वारा नेरी कला केन्द्र से सम्पुर्ण स्टाक की निकासी दिनांक 13.11.2021 को पूर्ण करा दी गयी थी तथा इस कमेटी द्वारा उच्च अधिकारियों को बोरे की कमी होने के बारे में सूचित करा दिया था परंतु प्रबंध निदेशक द्वारा कोई कार्यवाही नही की गयी, यदि समय रहते कार्यवाही की जाती तो इतिहास बनाते इस खाद्यान्न घोटाले को रोका जा सकता था परन्तु इसके विपरीत घोटाले को खुलते देखकर नेरीकला केंद्र पर तैनात प्राविधिक सहायक को निगम हित में प्रबंध निदेशक द्वारा हटा कर उपहारस्वरुप कुशीनगर राज्य भंडार गृह पडरौना भेज दिया गया और बोरों की कमी के चलते अशोक कुमार शुक्ला को प्रथम दृष्टया आरोपी बना कर कार्यवाही करने का आदेश जारी करना पूरे मामले को सिर्फ रफा-दफा करना दिखायी देता है।

प्रबंध निदेशक द्वारा किसी भी उच्च अधिकारी/हेंडलिग परिवहन ठेकेदार व नेरी कला केन्द्र पर नियुक्त सुरक्षा एजेंसी के विरुद्व कोई भी कानूनी कार्यवाही न करके मात्र 2 वर्ष से कार्यरत एक अदने से कर्मचारी को बलि का बकरा बना कर सभी जिम्मेदार लोगों को इस मामले से बचाने की पुरजोर कोशीश जारी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नए उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचारियों को तुरंत जेल के बयान के बाद डरते नजर नहीं आ रहे हैं और सरकारी अनाज में करोड़ों रुपए का घोटाला करके उत्तर प्रदेश में एक नया कीर्तिमान बना कर जेल तो दूर जांच से भी भागते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश का ये अनाज घोटाला ऐसा घोटाला है जिसमें मोदी सरकार के अधिकारियों के साथ योगी सरकार के अधिकारियों के नाम भी सुर्खियों में हैं। इन घोटालों की जांच समयबद्ध तरीके से ऐसी सक्षम एजेंसी को देना चाहिए जिसका कोई परिणाम सामने आए क्योंकि समाज और सरकार को घोटालों से बचाने की जरूरत है क्योंकि यह घोटाले पूरे समाज और सरकारी विभाग के तंत्र को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं जिसमें सुधार लाने की अत्यंत आवश्यकता है और योगी सरकार ने जिस तरह माफियाओं का उत्तर प्रदेश से राज ख़त्म किया है ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करके पूरे देश मे एक नया संदेश देने का काम भी किया जाएगा और मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीती को चुनौती देते अधिकारियों की सम्पत्ती पर बुलडोजर चला कर प्रदेश को सरकारी तंत्र को खोखला बनाते भ्रष्ट अधिकारीयों को दण्डित करने का सराहनीय कार्य योगी सराकर द्वारा किया जायेगा।