विपक्षी आरामतलबी में! हुकूमत मौज मस्ती में !!

डॉ मोहम्मद कामरान

मोहनदास करमचंद गांधी की 150वीं जयंती पर अगर भारत के प्रधानमंत्री मोदीजी ने भाजपा सांसदों से अपने लोकसभा क्षेत्र में 150 किमी पदयात्रा करने का निर्देश दिया है तो स्पष्ट है कि भाजपा की विचारधारा में आज बदलाव साफ साफ दिखाई दे रहा है, भाजपा आज उस विचारधारा को अपना रही है जिस पर चलकर मोहनदास करमचंद गांधी, महात्मा के नाम से सिर्फ अपने देश में ही नही बल्कि पूरी दुनिया मे जाने जाते है।

आइंस्टीन, ओशो, मार्टिन लूथर किंग सहित दुनिया भर की तमाम महान हस्तियां गांधी विचारधारा पर गर्व करती थीं और आज उन हस्तियों में मोदीजी और योगीजी भी सम्मिलित हो गए है। अफसोस कि बात है कि विपक्षी दल खासतौर पर कांग्रेसी नेता गांधीजी के व्यक्तिव, उनकी विचारधारा, अंग्रेजों से लड़ने की उनकी रणनीति को नही अपना पा रहे हैं। अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए गांधीजी इतना पैदल चले कि पूरी दुनिया के दो चक्कर पूरे हो जाते, 25 वर्षों में गांधी जी करीब 79,000 किलोमीटर पैदल चले, और अपने विपक्षी दल के ज़्यादातर नेतागण ED, CBI, Income Tax के खौफ से अपने अपने घरों में ऐसे छुप गए है जैसे काला पानी की सज़ा हो गयी हो, गांधीजी डरे होते तो आज मोदीजी उनकी राह नही अपनाते, रोज़मर्रा की ज़िंदगी मे इस्तेमाल होने वाले नमक उत्पादन और विक्रय में अंग्रेज़ी हुकूमत ने जब बड़ी मात्रा में कर लगा दिया तो इसके खिलाफ गांधीजी ने करीब 390 किमी पैदल यात्रा कर पूरे भारत में कर जनता को जगा दिया और इतिहास बना दिया।

देश की राजधानी में गाँधी जयंती पर 1.50 किमी की पैदल यात्रा हमारी भी

आज विकास और अच्छे दिनों की याद में जनता की आंखें पथरा गयी है, रोज़गार की मांग कही न कहीं Make in India की मुहिम में खो गयी है, आर्थिक मंदी की बातें, बढ़ती डॉलर की दरों में दब गई है, बनारस शहर जापान की नगरी क्यूटो से आगे क्या निकला, बिजली पानी घरों से निकल कर सड़कों पर आ गया, लेकिन घबराए, कमज़ोर विपक्ष को इन मुद्दों से बड़ा मुद्दा अपने ही घर को बचाने का लगता है, विपक्षी नेता Y और Z सुरक्षा की लालच में अपने ही घर को आग लगाने से नही चूंक रहे है ऐसे में मुद्दे होते हुए भी गांधी रणनीति को अगर हुकूमत अपना रही है तो विपक्षी दलों की लाचारी इससे ज़्यादा और क्या हो सकती है। अपनी आरामतलबी में वो पस्त हो रहें हैं और हुकूमत अपनी रफ्तार में मस्त हैं। जनता का क्या, धर्म, मज़हब, भक्ति, विकास, मंदिर, मस्जिद, देश, सेना के नाम पर खामोश है, बढ़ते कर्ज़, बेलगाम कर, बेरोज़गारी, मंदी पर विपक्ष की खामोशी पर एक गांधी की आस में देश को किसी महात्मा के अवतरित होने का इंतेज़ार है ।।