रियल लाइफ का राजा हरिश्चंद्र है यह बिहारी IAS अधिकारी, अपने बॉडीगार्ड से भी वसूल लेते हैं जुर्माना

जब संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहा था यह आईएएस तभी इसने फर्णीश्वर नाथ रेणु की रचित कहानी मैला आंचल पढ़ी थी। किस्मत शायद यही चाहती थी कि यह अधिकारी इस क्षेत्र की दशा और दिशा को बदले। उस वक्त के परिवेश में लिखी वह कहानी और इतने दशकों बाद आज के परिवेश में कुछ विशेष अन्तर नहीं पाते हुए इस अधिकारी ने पूरे परिदृश्य को बदलने के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रतिज्ञा ली और काफी हद तक सफलता भी पाई।

हम बात कर रहे हैं 2014 बैच के IAS अधिकारी सौरभ जोरवाल के बारे में। जब वे बतौर एसडीओ सदर प्रशिक्षण के लिए बिहार के पूर्णिया जिले में पदास्थापित हुए तो उन्होनें 50 साल पहले लिखी कहानी में कोई विशेष बदलाव नहीं पाया। जयपुर में पले-बढ़े सौरभ ने अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी दिल्ली से पूरी की है। पूर्णिया जिले में पदास्थापित होने के बाद उन्होनें वहां की परिस्थितियों को बदलने की ठानी। बस उन्हें कुछ अनुभवों की कमी थी। जहाँ अनुभव की कमी बाधा बनती, सौरभ पुराने अधिकारियों से बिना किसी झिझक के मदद लेते और उनके द्वारा दिए गये सुझावों पर भी अमल करते।

पूर्णिया पोस्टिंग के बाद सौरभ जोरवाल का स्थांतरण बिहार के ही सहरसा जिले में हुआ। यहाँ अतिक्रमण की समस्या इतनी जटिल थी कि पीछले 33 सालों से इससे निजात नहीं पाया जा पा रहा था। सब्जी मण्डी में साइकिल रखने तक की जगह नहीं थी। बात करने पर लोगों ने जाम की बात स्वीकार की परंतु वे अपनी दुकान के लिए जगह चाहते थे। सौरभ ने डी.एम. और जिला प्रशासन की मदद से वहाँ सुपर मार्केंट बनवाया और फिर दुकानदार खुशी-खुशी वहाँ शिफ्ट कर गये। वहाँ के लोगों की माने तो सौरभ ने सहरसा की तस्वीर बदल दी। डी.बी. रोड, थाना चौक, शंकर मार्केट से अतिक्रमण हटवा दिया। 33 सालों बाद बिना किसी हल्ला हंगामें के अतिक्रमण हट जाने से वहाँ के निवासी बहुत खुश हैं और सौरभ जोरवाल की खूब प्रसंशा कर रहे हैं।

सौरभ अपने काम में तकनीक का भी सहारा लेतें हैं। सहरसा शहर में पानी निकासी की समस्या हो रही थी। इस संबंध में में उन्होंने डी.एम. से भी बातचीत की लेकिन समस्या का कोई सामाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद उन्होनें गूगल मैप का सहारा लिया और पानी के निकासी की समस्या दूर कर दी। सहरसा के लोंगों को इस तेजतर्रार IAS अधिकारी का काम बहुत भा रहा है। जोरवाल सरकारी सेवा में नए हैं पर अपनी काबिलियत से खुब सुर्खियाँ बटोर रहे हैं। चाहे़ वह विधि व्यवस्था की स्थापना हो या जुर्माना वसूलना, कानून व्यवस्था सब के लिए एक है। अभी कुछ दिन पहले ही अपने बाॅडीगार्ड से भी वाहन चेकिंग के दौरान शंकर चौक पर उन्होंने 300 रूपये वसूला क्योंकि गार्ड बिना हैलमेट और जूते के बाइक पर सवार थे।

सौरभ जोरवाल इलाके में शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करना चाहते हैं। उनके अनुसार इलाके में शिक्षा के विकास की असीम संभावना है। ग्रामीण इलाके आज भी मैला आँचल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। अधिकारी और आम लोगों के बीच जो गैप है उसे पाटने की जरुरत है। विधि व्यवस्था, आपूर्ति व्यवस्था, जल निकासी आदि पर विशेष रुप से काम करने वाले सौरभ तकनीक के इस्तेमाल के लिए आई.आई.टी की कार्य ऐंजिसियों से भी मदद ले रहे हैं।

कहा जाता है कि यदि अधिकारी अपने अधिकार की बारिकियों को जानता हो तो उसे सरजमी तक उतारने में परेशानी नहीं होती। सौरभ जोरवाल की चर्चा आज से 33 वर्ष पूर्व बहूचर्चित डी.एम. मदन मोहन झा के रुप में हो रही है। एक तटस्थ और कर्मठी अधिकारी शहर और वहाँ के लोगों के जीवन की तस्वीर बदल सकता है। आज देश का यह पुर्वांचल क्षेत्र मैला आंचल से बाहर निकल कर सौरभ जोरवाल के साथ एक नई कहानी लिख रहा है।

समय के साथ सहरसा से भी इनका स्थांतरण बिहारशरीफ (नालंदा) में नगर निगम आयुक्त के पद पे पदस्थापित कर दिए गए थे जहाँ इन्होने वहां भी अपने 2 वर्षो के कार्यकाल में ही इन्होने ऐसे कई सारे कामो को करते हुए जिले को शीर्ष शेखर पे पहुंचाकर जिले को कई सारे सम्मानों से नवाज़वाने का कार्य किये …. सौरभ जोरवाल बिहारशरीफ के नगर निगम के आयुक्त थे और बिहारशरीफ को चकाचक यानि स्मार्टसिटी बनाने का जिम्मा भी इन्ही के पास था। सौरभ जोरवाल को तेज तर्रार और ईमानदार अफसर माना जाता है। बिहारशरीफ का कायाकल्प करने के लिए ये दिन रात तत्पर रहते थे। साथ ही सौरभ जोरवाल की गिनती ऐसे अफसर के तौर पे की जाती है जो लोगो से मिलने में सुलभ माने जाते है। इन्हे लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ है और न ही कभी कोई विवादित निर्णय लिए है। इनके कामकाज की खासियत ये है कि ये सामंजस्य बनाकर काम करते हैं ।

वर्तमान में अभी इन्हे राज्य सरकार बिहारशरीफ (नालंदा) में नगर निगम आयुक्त के पद से स्थांतरण करते हुए इन्हे नयी जिम्मेवारियों के देते हुए इन्हे औरंगाबाद के जिलाधिकारी के पद पे पदस्थापित किये है।