ये सैनिक हैं, इसलिए हम हैं

“एक्सपो में देश के सरहदों पर शहीद हुए सैनिकों की शौर्य गाथा के लिए कोई जगह नही”

डॉ मोहम्मद कामरान

Defence Expo के बहाने ही सही लेकिन एक दिन सैनिकों के नाम, क्योंकि यही वो सैनिक है जो अपनी जान को दांव पर लगाये बैठा है, और हम मस्ती से अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं, अपने परिवार से मीलों दूर तन्मयता से अपना कर्तव्य निभाता है ये सैनिक तभी हम अपने परिवार के साथ खुशियाँ बाँट पाते हैं. हजारों फीट ऊपर ठण्ड में अपनी हड्डियाँ गलाता है, तभी हम पूरी तरह जीवन का आनन्द उठा पाते हैं;

ज सैनिकों के साथ सेल्फी लेकर, पैराट्रूपर्स के बोझ को अपने कंधों पर लादकर, उनके बंकरों में उनके साथ वक़्त बिता कर, उनको सम्मान देकर दिल को सुकून तो मिला लेकिन वहीं अफसोस इस बात का है जिन सैनिकों के चलते हम आज़ादी से खुली हवा में सांस लेते है उन्हीं सैनिकों को हम जीते-जी यथोचित सम्मान नही देते है और उनकी शहादत के बाद भी राजनीति अपना रंग दिखाती है जिसके चलते अब आम नागरिक भी सैनिकों को देश पर जान न्यौछावर करने वाले के रूप में नहीं वरन सेना में नौकरी करने वाले व्यक्ति के रूप में देखने लगे हैं; उनके कार्य को देश-प्रेम से नहीं बल्कि जीवन-यापन से जोड़ने लगे हैं; उनकी शहादत को शहादत नहीं वरन नौकरी करने का अंजाम बताने लगे हैं.

बहरहाल, देर तो अभी भी नहीं हुई है. हम सभी को एकसाथ इस दिशा में प्रयास करना होगा,, हवाई जहाज़, टैंक, हेलीकाप्टर के साथ सेल्फी तो बनती है लेकिन देश के सैनिकों को प्रथमिकता देने की ड्यूटी भी निभानी होगी, Defence Expo तो चला जायेगा लेकिन किसी न किसी दिन सैनिकों के लिए भी कलम उठानी होगी, घर परिवार के बच्चों को अपने सैनिकों की वीरता के बारे में बताना होगा और शहीद हुए सैनिकों को उनका हक, सम्मान दिलाने के लिए अलख भी जगानी होगी।

एक तरफ काबीले तारीफ Defense Expo जैसे आयोजन पर सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर सैनिकों द्वारा सरहद पर की जा रही जांबाज़ी, हथियारों की नुमाइश कर रही है, एक्सपो के रास्ते प्रदेश में तरक्की, उद्योग, रोज़गार के नए आयाम खोल रही है, वही इस एक्सपो में देश के सरहदों पर शहीद हुए सैनिकों की शौर्य गाथा के लिए कोई जगह, कोई स्टाल नही है, देश पर अपना सर कटवाने वाले शहीद हेमराज की शहादत के अनेक साल बाद भी परिवार मदद के लिए दर दर भटक रहा है.

सरकार के वादे अब भी कागजों पर ही है.शहीद हेमराज की पत्नी धर्मवती और उनके तीन बच्चे बीते छह साल से एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं. Defense Expo के माध्यम से ही सही लेकिन हमारे शहीद जांबाज़ सैनिकों को उनकी शहादत पर किये गए वादे सरकार को ज़रूर पूरे करने चाहिए और सैनिकों की शहादत पर राजनीति नही होनी चाहिए, और हमारा फ़र्ज़ है कि हम हेमराज जैसे सैनिकों को गुमनामी में न खोने दें. आइये इस Defense Expo के माध्यम से हम संकल्पित हों, अपने सैनिकों के लिए, अपने तिरंगे के लिए और अपने वतन के।लिए,, जय हिंद ,,,