बहुत तनाव है, कुछ पता करो चुनाव है क्या…

पाकिस्तानी सैन्य हुक्मरान वाकई बहुत शातिर हैं! भारत में जब कभी कोई चुनाव होता है, वे सरहद पर कोई साजिश या मार-काट करने लगते हैं! दोनों तरफ से हताहतों की अपनी-अपनी गिनती और दावे शुरू हो जाते हैं! कुछ बरसों से यह सिलसिला सा हो गया है! फिर अपने यहां चुनाव में जनता के बचे-खुचे मसले भी गायब! कोई कुछ और नहीं बोल पाता! सिर्फ सरहद और हिंदुस्तान-पाकिस्तान! या फिर आतंक, कश्मीर और हिंदू-मुसलमान ! टीवी चैनलों पर शौर्य-प्रदर्शन शुरू हो जाता है! नई-पुरानी कहानियां दिखाई जाने लगती हैं! स्टूडियो में गर्जना होने लगती है! ‘सर्जिकल-सटृाइक’ के फुटेज में धड़ाम-धड़ाम दिखने लगता है!

सत्ता आश्वस्त हो जाती है! मतगणना और उसके बाद कुछ समय के लिए विषय बदल जाते हैं! सरकार फैसले करने लगती है, जनता तबाह होने लगती है, अमीर और अमीर होने लगते हैं! परदेस के सम्मेलनों और जलसों में डिप्लोमेसी चमकने लगती है! अपनी ‘डेमोक्रेसी’ चालू रहती है, अगले चुनाव के इंतजार में!

Source : वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश Urmilesh ने फ़ेसबुक पर लिखा।