पुष्पेंद्र इनकाउंटर !अलार्मिंग: वसूली के विवाद में हत्या, बताया मुठभेड़!!!!!!

झांसी में पुष्पेन्द्र यादव का एनकाउंटर बेहद गंभीर सवाल उठा रहा है. पुलिसिया कहानी में झोल ही झोल हैं. बकौल इंस्पेक्टर धर्मेन्द्र सिंह चौहान कानपुर में दो दिन की छुट्टी बिताने के बाद लौटते वक्त पुष्पेन्द्र ने उन्हें फोनकर मिलने को कहा, हाईवे पर हुई मुलाकात के दौरान पुष्पेन्द्र ने इंस्पेक्टर को घायल किया और उनकी कार लूट कर भाग गया. इसके बाद पुलिस ने चरम बहादुरी का परिचय देते हुए उसे मुठभेड़ में मार गिराया, अब जरा गौर करें.
1-आपने इससे पहले कब सुना है कि कोई लुटेरा पुलिस अफसर को बाकयदा फोन करके मिलने को बुलाए फिर उसकी कार लूटकर भाग जाए. शातिर से शातिर अपराधी भी ऐसी हिमाकत नहीं कर सकता, फिर पुष्पेन्द्र पर तो एक भी मुकदमा दर्ज नहीं था.
2-तीन दिन पहले ही पुष्पेन्द्र का बालू लदा ट्रक सीज हुआ था, पुख्ता सूत्रों के मुताबिक लगातार उसकी इंस्पेक्टर से बात हो रही थी, ऐसे में वो कोई ऐसा लूटेरा तो हरगिज नहीं हो सकता था जो अँधेरे में इंस्पेक्टर की कार के सामने आया हो और लूटकर भाग निकला हो.
3-एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक अब भले ही सपाई खेमा आंदोलित दिख रहा हो लेकिन पुष्पेन्द्र बीजेपी के एक विधायक का खासमखास था और उन्हीं की सरपरस्ती में खनन के लेनदेन की कड़ी था. वो झांसी में अंजान चेहरा नहीं था, इंस्पेक्टर की कॉल डिटेल का व्यापक परीक्षण कराने से पुष्पेन्द्र से लगातार हो रही बातचीत को तस्दीक किया जा सकेगा.
4-धीर गंभीर सूत्रों के मुताबिक पुष्पेन्द्र जब इंस्पेक्टर से मिलने गया उस वक्त उसके पास बड़ी रकम थी, मुलाकात के दौरान गहमागहमी हुई, एक तरफ खाकी की गर्मी थी तो दूसरी तरफ सत्ताधारी विधायक के आशीर्वाद का उबाल इसी दौरान पुष्पेन्द्र को गोली मार दी गयी, फिर एनाकाउंटर की लचर कहानी गढ़ी गयी.
इस मामले में निष्पक्ष, दबावरहित जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि जिस शख्स पर एक भी मुकदमा दर्ज न हो उसे मुठभेड़ में मौत घाट उतारने का चलन समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है, इस मामले में सभी को जाति-पार्टी-विचारधारा की हदों से निकलकर सच समाने लाने की मांग बुलंद करनी चाहिए…..

ज्ञानेंद्र शुक्ल की फेसबुक पोस्ट से