जापान एक बार फिर भूकंप और सुनामी की जद में !

पूर्वोत्तर जापान में एक बार फिर 7.1 त्रीवता का तगडा भूकंप आया है।भूकंप के बाद समुद्र में ऊँची ऊँची लहरें उठनी लगी थी,स्थानीय प्रशासन ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी थी जिसे बाद में वापस ले लिया गया।जापान के सरकारी टेलीविजन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था जिन इलाकों के लोग सुनामी के कारण प्रभावित हो सकतें हैं,वे ऊँचाई वाले इलाके में चले जाएं।
भूकंप और जापान का चोली-दामन का साथ है।दरअसल इसका प्रमुख कारण यहाँ मिलने वाली धरती की सबसे अशांत टेक्टोनिक प्लेट्स को माना जाता है।ये प्लेटें एक अभिकेंद्रित सीमा बनाती हैं, जिसके कारण यह क्षेत्र दूनिया के सर्वाधिक भूकंपों का केंद्र बन जाता है।विशेषज्ञ कहते हैं कि यह क्षेत्र पेसिफिक प्लेट,फिलिपींस प्लेट और अमरीकी प्लेट के नीचे लगातार जा रहा है।यही कारण है कि जापान में हर छोटे-बडे करीब एक हजार भूकंप के झटके महसूस किये जाते हैं।जापान पेसिफिक रिंग आँफ फायर के अंतर्गत आता है।इस रिंग आँफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर अलास्का, उत्तर अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका तक होता है।रूस,अमेरिका, कनाडा, पापुआ न्यू गिनी, पेरू और ताइवान जैसे देश भी इसकी सीमा के अंतर्गत आते हैं।
आपको याद होगा 11 मार्च 2011 को जापान में एक बेहद शक्तिशाली भूकंप आया था।भूकंप के बाद तुरंत सुनामी आ गई,जबतक लोग संभलते सुनामी ने काफी नुकसान कर दिया।भूकंप की त्रीवता 9.0 रिक्टर स्केल पर नापी गई।उस भूकंप को जापान का सबसे बडा और विनाशकारी भूकंप की संज्ञा दी गई थी।भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना था कि 1900 के बाद दूनिया में आए चार सबसे शक्तिशाली भूकंप में से एक था।
भूकंप के बाद प्रलयकारी सुनामी आ गई।तोहोकू के मियाको में सुनामी की लहरें करीब 40 मीटर यानी 133 फीट तक ऊँची थीं।सेन्दाई क्षेत्र में सुनामी की लहरों ने 10 किलोमीटर के क्षेत्र को तबाह कर दिया।इस सुनामी ने एक पूरे टाउन का अस्तित्व खत्म कर दिया था।इस भूकंप की त्रीवता इतनी थी कि जापान के सबसे बड़े द्वीप होन्शू को अपनी जगह से करीब आठ फीट पूर्व की तरफ खिसका दिया था।इतना हीं नहीं 9.0 त्रीवता के इस भूकंप का पृथ्वी के घूमने की रफ्तार से लेकर उसकी धुरी पर भी असर पडा।भूकंप ने पृथ्वी को अपनी धुरी पर करीब 10 सेंटीमीटर(4 इंच)से 25 सेमी(10 इंच) तक हिला दिया।साथ ही पृथ्वी की प्रतिदिन घूमने की रफ्तार 1.8us की वृद्धि हुई।भूकंप और सुनामी ने 15,869 लोगों की जान ली,कई हजार लोग घायल हुऐ।हजारों लोगों को अपने घरों से हाथ धोना पड़ा था।
सुनामी और भूकंप के कारण फुकुशिमा डायची न्यूक्लियर प्लांट को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।यहां के तीन रिएक्टर्स में लेवल 7 का ब्रेकडाउन दर्ज किया गया।प्लांट के 20 किलोमीटर तक में रहने वाले लोगों को वहां से हटा दिया गया था।कई महीनों तक रेडियोधर्मी पदार्थों के लीक होने का खतरा मंडराता रहा।
आपको बता दें 2011 के महाविनाशकारी भूकंप और सुनामी के चंद घंटों पहले जापान के समुद्री तट पर अनेकों ओरफिश को देखा गया था,जो तट पर आ गई थी।इस समय भी तट पर ओरफिश देखी जा रही है,जिससे पूरा जापान डरा हुआ है।जापान में मान्यता है कि ओरविल फिश तभी दिखती हैं जब बडा भूकंप आनेवाला होता है।

(श्री अजय श्रीवास्तव जी की फेसबुक वॉल से )