गठबंधन की बजाय हमेशा अकेले चलने में ही फायदे में रहती है सपा

यूपी में अखिलेश के एकला चलो के फार्मूले से उपचुनाव में सपा साबित हुई प्रमुख विपक्षी पार्टी

यूपी के उपचुनाव के परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रदेश में बीजेपी के मुकाबले जनता समाजवादी पार्टी को ही अहमियत देती है, उप चुनाव के परिणामों में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी ने 3 सीटें जीतकर और बाकी ज्यादातर सीटों पर मुख्य प्रतिद्वंदी बनकर एक बार फिर मुलायम सिंह यादव की एकला चलो की रणनीति पर मोहर लगा दी है।
2017 के विधानसभा आम चुनावों में जब अखिलेश यादव ने कांग्रेस से समझौता कर चुनाव लड़ने की ठानी तो यूपी की जनता को अखिलेश का ये फैसला पसंद नही आया इस लड़ाई में बीजेपी एकतरफा बाजी मारने में कामयाब हो गई जिसके बाद मुलायम सिंह ने जनता के मूड़ को भांपते हुए समाजवादी पार्टी को एकला चलो की रणनीति अपनाने की सलाह दी लेकिन इसके बाबजूद 2019 के लोकसभा आमचुनाव में अखिलेश यादव ने नया प्रयोग करते हुए यूपी की राजनीति में अपनी चिरप्रतिद्वंद्वी पार्टी से गठबंधन कर न सिर्फ अपने समर्थकों बल्कि सियासी पंडितों को भी चौका तो जरूर दिया लेकिन जनता को ये कतई रास नही आया और आखिरकार इस बार प्रदेश की 11 सीटों पर हुए उपचुनाव में जब अखिलेश ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा तो नतीजों से स्पष्ट हो गया कि जनता बीजेपी के मुकाबले में समाजवादी पार्टी को ही पसंद करती है, मैं पूर्व में भी समय समय पर सोशल मीडिया और फेसबुक पर अपने विचारों से यह साफ स्पस्ट करता रहा हूँ, जब जब समाजवादी पार्टी सत्ता से बाहर होती है तब यूपी की जनता मुलायम सिंह जी यादव वा उनके बेटे अखिलेश यादव जी की ओर बड़ी उम्मीद भरीं निगाहों से ताकती है और सरकार के जनविरोधी निर्णयों की मुखालफत के लिए समाजवादी पार्टी पर ही भरोसा करती है।