क्या मध्यप्रदेश के सीएम पतंजलि कंपनी के एजेंट की तरह काम कर सकते हैं?

क्या मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तमाम नियम कानूनों को ताक पर रखकर राज्य के कोरोना मरीज़ों की जान से खिलवाड़ करने वाले एक अवैध ड्रग ट्रायल की अनुमति दे सकते हैं?

पतंजलि ने इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन को लिखी ट्रायल की अनुमति मांगने वाली चिट्ठी में शिवराज सिंह चौहान और स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम का साफ उल्लेख किया है। (चिट्ठी देखिये)

रामदेव की कंपनी पतंजलि को इंदौर में ड्रग ट्रायल की अनुमति देने का मामला हमने उजागर किया था। इस मामले में कलेक्टर ने अनुमति को 24 घंटे से भी कम समय में निरस्त कर दिया था। जबकि कलेक्टर को अनुमति देने का अधिकार ही नहीं था।

पतंजलि की चिट्ठी में ड्रग ट्रायल की बात साफ लिखी है। इसे इंदौर प्रशासन ने छिपाने की भरपूर कोशिश की थी।

ट्रायलोलॉजि को यूं समझें

पतंजलि संस्थान ने 19 मई को एमजीएम मेडिकल कालेज डीन डॉ. ज्योति बिंदल को ड्रग ट्रायल के लिए पत्र लिखा था। (पत्र देखें)

इस पत्र के बाद डीन ने 21 मई को चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर पतंजलि की अनु तैला (नास्या थैरेपी), स्वसारी रास (बटी), गिलोय घनवटी, अश्वगंधा कैप्सूल, तुलसी घनवटी के उपचार की अनुमति के लिए पत्र लिखा था। यानी यह काढ़े वाली बात झूठी है।

पत्र में शासकीय स्वशासी अष्टांग आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय इंदौर द्वारा आयुर्वेदिक काढ़ा (आरोग्य कषायम्) के कोरोना मरीजों पर प्रयोग की अनुमति भी मांगी गई थी। जो अभी तक चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नहीं दी है।

ड्रग ट्रायल के लिए बदनाम हो चुका है इंदौर

इंदौर में कई डाक्टरों द्वारा बिना मरीज की अनुमति के दवा कंपनियों से पैसा लेकर ड्रग ट्रायल करने का बड़ा मामला सामने आया था।

इस मामले को समाजसेवी और मेरे वरिष्ठ साथी Chinmay Mishra ने उजागर किया था। इसके बाद राज्य शासन ने सभी मेडिकल कालेजों में किसी भी दवा के ट्रायल पर 25.10.2016 को प्रतिबंध लगा दिया था।

पल्ला झाड़ने की कोशिश

अब एमपी के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि न तो वे चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री हैं और न ही पतंजलि के किसी दवा के प्रयोग की उन्हें कोई जानकारी है।

ध्यान रखें- एमपी में चिकित्सा शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है।

गोल-मोल जवाब

चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला ने बताया कि एमजीएम इंदौर की डीन ने पतंजलि की दवाओं का कोरोना मरीजों पर प्रयोग करने की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति अभी भी विभाग के पास लंबित है।

एमजीएम मेडिकल कालेज इंदौर की डीन डॉ. ज्योति बिंदल का कहना है कि कलेक्टर मनीष सिंह ने इस बारे में हमसे कोई चर्चा नहीं की थी।

वे कह रही हैं कि पतंजलि संस्थान ने हमें कुछ दवाओं के कोरोना मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति का पत्र दिया था। इस पत्र के तारतम्य में हमने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिख दिया था, जहां से अभी अनुमति नहीं मिली है।

शक़ की सुई शिवराज सिंह और नरोत्तम मिश्रा पर

सीएम शिवराज सिंह चौहान अभी तक इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। क्यों?

1. उन्हें बताना पड़ेगा कि पतंजलि ने अपने पत्र में उनके और नरोत्तम मिश्रा के नाम का उल्लेख किस आधार पर किया है?

2. दोनों की रामदेव से क्या बातचीत और डील हुई है?

3. क्या इसकी कीमत इंदौर के कोरोना मरीज़ों को जान देकर चुकानी होगी?

4. अगर पतंजलि और एमपी में शीर्षस्थ पदों पर काबिज़ दोनों नेताओं से पतंजलि की चर्चा और डील की बात सही है तो शिवराज सिंह चौहान को पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

इस पूरे मामले में हमें पहले ही किसी बड़ी डील की आशंका थी। लेकिन दस्तावेजी सबूतों के साथ इससे पर्दा उठाने में मदद की है जागरण में मेरे वरिष्ठ सहयोगी रहे मनोज सिंह राजपूत ने।

उन्होंने कल रात ही ख़बरजाल में पूरे मामले को प्रमाणों के साथ छापा है। लिंक देख सकते हैं।