आईसीएमआर की रिपोर्ट का खुलासा, भारत में ऐसे लोग भी मिल रहे हैं कोरोना पॉजिटिव

दुनियाभर में कोरोना वायरस जम कर तबा’ही मचा रहा है. अब तक पूरी दुनिया में 16,05,279 लोग इस खत’रनाक वायरस से संक्रमित हो गए हैं. इनमें 95,752 लोगों की मौ’त हो चुकी है. वहीं, भारत में भी संक्रमण तेजी से फैलना शुरू हो चुका है. देश में अब तक संक्रमितों की संख्या 6,412 हो गई है, जिनमें 199 की मौ’त हो चुकी है. इस बीच सामने आई इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की नई रिपोर्ट में भी अच्‍छे संकेत नहीं मिल रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि अब देश में बिना संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आए भी कोरोना वायरस फैल रहा है. साथ ही ऐसे लोग भी संक्रमित हो रहे हैं, जो कभी विदेश गए ही नहीं हैं. आईसीएमआर के लिए गए सैंपल में ऐसे मरीजों की संख्‍या 38.46 फीसदी है.

आईसीएमआर की टीम ने 15 फरवरी से 2 अप्रैल के बीच 5,911 सीवियर एक्‍यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (एसएआरआई) वाले मरीजों में कोरोना वायरस की जांच की. इनमें 20 राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेश के 52 जिलों के 104 एसएआरआई मरीजों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया. आईसीएमआर की रिपोर्ट कहती है कि इन 104 एसएआरआई मरीजों में 40 लोग कभी भी कोरोना वायरस संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में नहीं आए. यहां तक कि इन लोगों ने कभी विदेश यात्रा से लौटे व्‍यक्ति से भी संपर्क नहीं किया. वहीं, देश के 15 राज्यों के 36 जिलों में मिले पॉजिटिव मरीज कभी विदेश गए ही नहीं थे. आईसीएमआर ने एसएआरआई मरीजों की सेंटिनल सर्विलांस के जरिये पता करने की कोशिश की है कि देश में संक्रमण कहां तक और कितना फैल चुका है.

आईसीएमआर ने 19 मार्च को कहा था कि काउंसिल ने कोरोना वायरस के कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की पहचान करने के लिए सेंटिनल सर्विलांस शुरू कर दिया है. वहीं, काउंसिल ने अपनी नई रिपोर्ट में निष्‍कर्ष में कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन को लेकर कुछ भी नहीं कहा है. फिर भी पिछले 24 घंटे में तेजी से सामने आए नए मामलों और बिना कोरोना पॉजिटिव व्‍यक्ति के संपर्क में आए संक्रमण फैलने की रिपोर्ट के आधार पर कहा जा सकता है कि देश में वायरस का कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन का ख’तरा सम्भवत शुरू हो चुका है. ऐसे में लोगों को ज्‍यादा सा’वधानी बरतने की जरूरत है. सेंटिनल सर्विलांस के निष्‍कर्षों के आधार पर आईसीएमआर ने कहा है कि संक्रमण को फैलने से रोकने की तमाम गतिविधियों को उन जिलों पर केंद्रित करने की जरूरत है, जहां एसएआरआई पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं. पेपर में कहा गया है कि एसएआरआई मरीजों के बीच कोरोना वायरस फैलने को लेकर सेंटिनल सर्विलांस को बढाकर संक्रमण को फैलने से रोकने की कोशिश की जानी चाहिए.

रिपोर्ट में साफ किया गया है कि इस अध्‍ययन की अपनी सीमाएं थीं. हो सकता है कि ये डाटा पूरे जिले, राज्‍य या देश की वास्‍तविकता को ना दर्शाते हों, फिर भी इससे कोरोना वायरस को लेकर संवेदनशील इलाकों के बारे में भरोसेमंद जानकारी हासिल की जा सकती है. आईसीएमआर ने बताया कि उसकी टीम ने मार्च के दूसरे सप्‍ताह में एसएआरआई मरीजों की रैंडम सैंपलिंग की थी. इसके बाद 20 मार्च को टेस्टिंग स्‍ट्रैटजी में बदलाव किया गया और अस्‍पतालों में भर्ती सभी एसएआरआई मरीजों को इसमें शामिल किया गया. इसके बाद 15-29 फरवरी और 19 मार्च को 965 एसएआरआई मरीजों की जांच की गई. इनमें सिर्फ 2 यानी 0.2 फीसदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए.

आईसीएमआर ने जब अपनी टेस्टिंग स्‍ट्रैटजी में बदलाव किया तो 4,964 सैंपल में 102 यानी 2.1 फीसदी पॉजिटिव केस मिले. काउंसिल का कहना है कि शुरुआती हफ्तों से सर्विलांस पूरा होने के बीच पॉजिटिव मामलों में शून्‍य से 2.6 फीसदी की वृद्धि हो चुकी थी. काउंसिल के मुताबिक, सैंपल के लिए चुने गए एसएआरआई मरीज वो थे, जिनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्‍कत या निमोनिया के लक्षण थे. अमूमन सेंटिनल सर्विलांस किसी बीमारी के कम्‍युनिटी में फैलने की रफ्तार का आकलन करने के लिए की जाती है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक, किसी खास बीमारी का हाईक्‍वालिटी डाटा हासिल करने के लिए सेंटिनल सिर्वलांस सिस्‍टम का इस्‍तेमाल किया जाता है. इसके जरिये किसी देश में बीमारी की गंभीरता, समय के साथ उसके ट्रांसमिशन और फैलने के क्षेत्र का आकलन किया जाता है.