‘ अमर्त्यसेन या अभिजीत बनर्जी का क्या योगदान है भारत के लिए ? ‘

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अपने मुह को मत लपरिआइये, न ही हंसिये , रोना तो कत्तई नही , वाकई यह सवाल हमसे पूछा गया है , हमारी उस पोस्ट को जाकर देख लीजिये जो हमने श्रीमती डुफ्लो और अभिजीत बनर्जी को बधाई दिया है । उसपर यह सवाल उठा है । उठाने वाले मित्र हैं Dinesh Joshi जी ।
हम इससे भी ज्यादा कई बेहूदे सवाल उठा कर जवाब दे सकते थे मसलन गलेलियो का क्या योगदान है या नेल्सन मंडेला को हमने भारत रत्न क्यों दिया , कोई योगदान ? गांधी दुनिया के हर हिस्से में मान्य हैं पूजे जाते हैं उन देशों को योगदान मिला होगा तभी न ?
जोशी जी ! आप के ‘ योगदान ‘ की परिधि क्या है ? योगदान की परिभाषा क्या है ? बोल दूँ तो आपको गुस्सा लग जाएगा । तो आप पहले योगदान समझ लीजिए ।
भारत एक देश है । यहां इंसान रहते हैं । कोई भी जो सोच होती है वो इसी इंसान को इकाई मान कर विचार बनाती है और वह विचार जितना विस्तार लेगा उतना ही जीवित और अक्षुण मिलेगा । गांधी की सोच एक स्थिति में देश काल और परिस्थिति को फलांग गई और सारे दुनिया के नेता बन गए क्यों कि उनकी सोच इंसानी सभ्यता के आखिरी पायदान पर खड़ा इंसान रहा । वह भारत का हो , इथोपिया का हो या साम्राज्यवादी ब्रिटेन का ही क्यों न हो मानचेस्टर के मजदूर इसके उदाहरण हैं । उन्हीं के बनाये कपड़ों को होली जला कर यह फकीर मानचेस्टर के मजदूरों के बीच खड़े होकर दोनो बांह फैला दिया था बता दिया था देख लो हम भारत हैं । वह भारत कंधे पर उठा लिया गया था । आखिरी पायदान मुहावरा भर नही है उसे जानने के लिए वहां तक जाना पड़ेगा । तंज सहना पड़ेगा । चर्चिल तुम्हें आईना दिखायेगा – अधनंगा फकीर । बापू का बड़प्पन देखो उन्हों कहा हमारे लिए ‘ काम्पलीमेंट ‘ है ।
मित्र जोशी ! अमर्त्यसेन ने एक सास्वत सच बोल दिया , आप उनके दुश्मन बन गए लगे गरियाने । उनके बोले का मर्म समझे बगैर । पूंजी बता दिया अमर्त्यसेन ने – पूंजी न करेंसी है न ही सोना । पूंजी है जमीन और जानवर । हजार की नोट एक सेकंड में ठोंगे के भी काबिल नही रहा आपने खुद देखा होगा । सोना की चमक तभी तक है, जब तक आप उसकी चमक को मान रहे हैं । पशु धन और जमीन की व्याख्या सारी दुनिया की बन गयी अभी आपको समझ ही आया कि भारत के लिए क्या किया ?
अभिजीत को खूब पढ़ा हु। कहाँ तक आपको समझाऊ हमने तो आपका बहाना लिया है हमारा मकसद है बात लोंगो तक पहुंचे । अभिजीत भी उसी आखिरी इंसान की बात करते हैं राहुल गांधी के ‘न्याय’ का मूलमंत्र है आखिरी पायदान को मजबूत करो , ऊपर तक मजबूती आएगी । समाज जब तक बराबर नही होगा गैर बराबरी उसे मारती रहेगी । यह केवल उगांडा के लिए नही है , भारत के लिए भी है बल्कि इस समय तो भारत के लिए कुछ ज्यादा ही जरूरी है । लेकिन यह आपको , मोदी को और Vवित्त मंत्री को पचेगा नही । वजह है आप अम्बानी अडानी को मजबूत कर मुल्क बनाए जाने की हवाबाजी करते हैं ये लोग आखरी पायदान को मजबूत कर भारत को मजबूत बनाना चाहते हैं ।
जोशी जी ध्यान से मत पढियेगा , डांट पड़ेगी ।

(  श्री  chanchal bhu की फेसबुक वॉल से )