जिस पत्रकार की शुरुआत ही फ़र्ज़ी हो, उसको ख़त्म क्यों नहीं होना चाहिए ?

जिस पत्रकार की शुरुआत ही फ़र्ज़ी हो, उसको ख़त्म क्यों नहीं होना चाहिए ?
कौन था वो पत्रकार जिसने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत एक फ़र्ज़ी स्टिंग (Sting) से की थी।

यह भी पढ़ें : ये मीडिया पेडलर

दिल्ली की एक निर्दोष अध्यापिका (Teacher) उमा खुराना (Uma Khurana) को सेक्स रैकेट का सरगना बताकर, लगभग उनकी लिंचिंग (Lynching) करवा दी थी।

यह भी पढ़ें : कोरोना योद्धा पार्षद वीरू की शहादत पर पचास लाख का मुआवजा ही सच्ची श्रदांजलि होगी

चैनल द्वारा स्टिंग के वीडियो फुटेज प्रसारित करने के तुरंत बाद, 41 वर्षीय खुराना को अनैतिक तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, एक हफ्ते बाद, स्टिंग को गलत एवं झूठा पाया गया।

यह भी पढ़ें : मोदी को सेक्स सिम्बल मानने वाले गुप्ता जी गलतबयानी कर रहे हैं

क्यूंकि महिला को एक छात्र के रूप में दिखाया गया था और एक वेश्यावृत्ति रैकेट का शिकार एक महत्वाकांक्षी पत्रकार निकला।

यह भी पढ़ें : फिक्की फ्लो ने आयोजित किया कार्यक्रम “ए फेस टू फेस विद डॉ. किरण बेदी”

अदालत ने बाद में खुराना को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। मगर सोचिए क्या मिला उस महिला को। खबरों में रुसवाई हुई।

यह भी पढ़ें : प्रसाद का शाब्दिक अर्थ हुआ परिभाषित

जो चैनल ने जनभावना तैयार की, उसकी वजह से कपड़े फटे। पिटाई मिली। जान किसी तरह बच गई। मगर फर्जी स्टिंग चलाने वाले पत्रकार महोदय आज तरक्की करके सुना है करोड़ो के मालिक हो गए है।

Show More

Related Articles