ये मीडिया पेडलर

ये मीडिया पेडलर

मुम्बई में रिया के साथ जो कुछ भी हुआ वह मीडिया के लिए शर्मनाक है। कानून की भाषा में इसे मोलेस्ट्रेशन कहते हैं। जब आप किसी महिला को उसकी मर्जी के बिना टच करते हैं तो वह मोलेस्ट्रशन में आता है। चाहे जानबूझ कर चाहे अनजाने। रिया के साथ टीवी कैमरे में सारी दुनिया के सामने मीडियावालों ने मोलेस्ट्रेशन किया। लेकिन कोई महिला आयोग सामने नहीं आया।

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रिया ड्रग लेती हो, ड्रग पेडेलर हो, चाहे वो हत्यारी क्यों न हो। किसी को हक नहीं पहुंचता कि उसके साथ ऐसा बर्ताव किया जाए। किसी स्त्री की गरिमा का सम्मान करना किसी भी पेशे का पहला उसूल है। दरअसल इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया ने ड्रग पेडलर की तरह मीडिया पेडलर नाम की एक नई प्रजाति पैदा की है। ड्रग पेडलर का माने है फेरी लगाकर ड्रग बेचना।

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ये मीडिया पेडलर माइक लेकर कवरेज के लिए फेरीवाले बन जाते हैं। आप बोलना चाहें या न चाहें वो माइक आपके मुंह में ढकेल देंगे। वे कहते हैं वे अपना काम कर रहे हैं। ये हक आपको किसने दिया कि आप जबरदस्ती मुझसे बात करने के लिए माइक मेरे मुंह में ठूस दें। ऐसे ही एक पेडलर को ड्रग पेडलर के पिता ने धक्के देकर अपने घर से निकाल दिया। पत्रकार के साथ गाली गलौज भी की। ये सारी पत्रकार बिरादरी के लिए सचमुच शर्मनाक है। अगर यही हाल रहा हो कल आपसे कोई बात करना पसंद नहीं करेगा। मैं इस घटना की निंदा करता हूं। आपको भी करनी चाहिए।

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