मूल्यांकन की खामियों का खामियाजा U.P. बोर्ड के छात्रों को ?

Dr. Mohammad Kamran

उत्तर प्रदेश में 10वीं और 12वीं के परीक्षार्थियों के समस्त बोर्डके परिणाम घोषित हो चुके हैं, बड़ी संख्या में छात्रों को अच्छे नंबर मिले हैं वहींबहुत से छात्र कम नम्बरों के आने पर अपने को असफल भी मान रहे होंगे, एक वो दौर था जब80 या 90 परसेंट आते थे तो पूरे प्रदेश में बवाल मचा करता था, पूरे शहर में हंगामामत जाया करता था और डिस्टिंक्शन लाने वाले का हीरो की तरह स्वागत होता था, उस वक़्त90 परसेंट लाने वालों की तादाद बमुश्किल हाथों की उंगलियों पर गिनी जा सकती थी लेकिन अब ऐसा दौर है कि 600 में से 600 नंबर लाने वालों की तादाद होती है और 90 परसेंट कीबात तो दूर, 99 परसेंट वालों की लंबी चौड़ी लिस्ट होती है।

वैसे तो बोर्ड की परीक्षा देने वाला प्रत्येक विद्यार्थी चाहताहै कि वह बोर्ड की परीक्षा में टॉपर बने, अच्छे अंको से पास हो, इसके लिए वह दिन रातमेहनत करता है और जब नतीजे आते है तो किसी विद्यार्थी ने कम मेहनत के बावजूद परीक्षामें टॉप करा होता है जबकि कुछ विद्यार्थी रात दिन की पढाई के बावजूद परीक्षा में अच्छेअंक लाने से वंचित रह जाते हैं और इसकी एक बड़ी वजह मूल्यांकन प्रणाली है और मूल्यांकनकी खामियों की वजह से अगर परीक्षार्थियों के कम नंबर आते हैं तो यह एक चिंताजनक, विचारनीयमहत्वपूर्ण बिंदु है जिस पर विचार किया जाना अति आवश्यक है।

हर साल माध्यमिक शिक्षा परिषद जो उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल एवंइंटरमीडिएट स्तर की परीक्षाओं का संचालन करता है अपने नतीजों की घोषणा सबसे पहले करताहै और देखा जाए तो माध्यमिक शिक्षा परिषद विश्व की एक सर्वोच्च संस्था है जो इतनी बड़ीपरीक्षाओं का संचालन करता है लेकिन जैसे-जैसे दिल्ली बोर्ड, ICSE ओर CBSE के नतीजेआने शुरू होते हैं तो UP बोर्ड के छात्र-छात्राओं को मिलने वाले नंबर और उनके परसेंटेजबहुत पीछे हो जाते है। UP बोर्ड के छात्राओं के पर कट जाते हैं और उनकी ऊंची उड़ान केसपने टूट जाते है, उनके ज़हन में ये सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है कि आखिर इतने नंबरआते कैसे हैं, 600 में से 600 यानी शत प्रतिशत, कोई गलती नही, कहीं मूल्यांकन में कोईगलती तो नहीं हो जाती और अगर 600 में से 600 नंबर आते भी हैं तो उत्तर प्रदेश बोर्डके परीक्षार्थियों के इतने नंबर क्यों नहीं आ पाते और इन्ही सवालों के उधेड़बुन मेंउसके सपने बिखर जाते है और आत्म विश्लेषण के चक्कर में UP बोर्ड के छात्र दिल्ली बोर्डसे कहीं पीछे छूट जाते है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी बोर्ड की परीक्षाफल आने से पहले अपने संदेश में परीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा था कि परीक्षाव परीक्षा फल आत्म विश्लेषण का माध्यम मात्र है तथा प्रत्येक परीक्षा फल को सहजतापूर्वकस्वीकार करना ही श्रेष्ठ है, मुख्यमंत्री जी के संबोधन को उनके प्यारे बच्चों ने ग्रहणतो कर लिया लेकिन जब आगे बढ़े और जिंदगी की अंक तालिका की रेस की मेरिट में अपने आपको दिल्ली बोर्ड के छात्रों से हारते पाया तो मनोनुकूल परीक्षा फल की प्राप्ति होनेके उपरांत भी मूल्यांकन की खामियों के चलते उत्तर प्रदेश बोर्ड के छात्र आखिर पिछड़तो गए। इस हक़ीक़त को बड़े बड़े आत्मविश्लेषण जैसे शब्दों की आड़ लेकर बचना नही होगा बल्किआत्म चिंतन करके इस व्यवस्था को बदलना ही होगा तभी सबका साथ सबका विकास का अर्थ पूर्णहोगा।

वक्त के बदलाव के साथ साथ मूल्यांकन की प्रणाली में भी बदलाव आयाहै और स्टेप मूल्यांकन व्यवस्था जो सीबीएसई बोर्ड ने शुरू की थी यूपी बोर्ड द्वाराभी अपनायी गयी। इस व्यवस्था में किसी सवाल को हल करने का तरीका अगर सही है मगर किसीवजह से उत्तर गलत आ रहा है तो भी छात्र को कुछ न कुछ नंबर जरूर दिया जाना चाहिए जिससेछात्र का हौसला बढ़ सके और रिजल्ट भी बेहतर हो जाए, लेकिन इसके बावजूद भी UP बोर्डके छात्रों का परिणाम दिल्ली बोर्ड के छात्रों से पिछड़ ही रहा है।

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क्या उत्तर प्रदेश बोर्डके परीक्षार्थी सवालों के जवाब लिखने में कमजोर हैं या दिल्ली बोर्ड के परीक्षार्थीको मार्क्स देने की गाइडलाइन का ज़्यादा फायदा मिलता है और अगर मूल्यांकन ही आधार हैतो कहीं ना कहीं उत्तर प्रदेश बोर्ड के परीक्षार्थियों के साथ यह एक बड़ा सौतेला व्यवहारकिया जा रहा है क्योंकि इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात दिल्ली बोर्डके परीक्षार्थियों के समकक्ष उच्च शिक्षा के आवेदन के लिए जब फार्म भरे जाते है तोउत्तर प्रदेश बोर्ड के छात्रों को मूल्यांकन की खामियों का खामियाजा भुगतना पड़ता है,जिसके चलते दिल्ली यूनिवर्सिटी या और भी बड़े कॉलेजों में उन्हें दाखिला सिर्फ इसीआधार पर नहीं मिलता कि वह मेरिट लिस्ट में दिल्ली बोर्ड के छात्रों से नीचे दिखाई देतेहैं और घर परिवार का सपना कि बेटा बड़े कॉलेज में पढ़ेगा टूट जाता है, अच्छे नंबर लाएगातो अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा यह स्वप्न कहीं ना कहीं हारने लगता है और उत्तरप्रदेश बोर्ड के छात्रों का आत्मविश्वास डोलने लगता है।

जिंदगी की मैराथन दौड़ का यह पहला अहम पड़ाव शुरू होने से पहलेसिर्फ मूल्यांकन की खामियों के चलते हारता नजर आता है और यह कैसी हार होती है जिसकेलिए उसकी प्रतिभा, उस की बौद्धिक क्षमता जिम्मेदार नहीं हो सकती और वह बिना हारे हीयह दौड़ हार जाता है, हर छात्र आइंस्टीन तो हो नहीं सकता जिन्हें स्कूल से निकाल दियागया था, पॉलिटेक्निक में दाखिला देने से इंकार कर दिया गया था लेकिन इन सबके बावजूदभी जीनियस के तौर पर पहचाने जाने वाले वैज्ञानिक आइंस्टीन ने दुनिया में अपना नाम साबितकिया लेकिन उत्तर प्रदेश में तो UP बोर्ड के छात्र सिर्फ मूल्यांकन के चलते हर जगह हार जाते है, दिल्ली बोर्ड के छात्र और उनके माता-पिता अपने बच्चों की मार्कशीट मेंमिले हुए शतप्रतिशत या 99 प्रतिशत मार्क्स को लहरा कर फेसबुक पर वाहवाही बटोरते हैंवही UP बोर्ड के छात्र-छात्राएं मूल्यांकन की खामियों के चलते असफल दिखाई देते हैं और उनके माता-पिता अपने बच्चों के लिए एक ऐसी डिप्रेशन की जमीन तैयार कर देते हैं जिसको पार पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। उन माता-पिता की आंखों के आगे दिल्ली बोर्ड के टॉपरऔर 99 प्रतिशत के बच्चों की मार्कशीट ही दिखाई देती हैं और उत्तर प्रदेश बोर्ड के छात्रोंके नामचीन कॉलेज में दाखिले के सारे रास्ते बंद दिखाई देते हैं और इस नंबर गेम के चक्रव्यूहसे UP बोर्ड के छात्र बाहर निकलने से पहले ही दम तोड़ देते है।  सोशल मीडिया और किटी पार्टीज में भी दिल्ली बोर्ड एक बार फिर बाजीमार ले जाते हैं और UP बोर्ड की माँ अपने होनहार बच्चे की मार्कशीट दिल्ली बोर्ड कीमम्मा के सामने न तो फेसबुक पर लहरा पाती और न ही किसी किट्टी पार्टी में दिखा पाती,UP बोर्ड के पिताजी सेल्फी नहीं ले पाते वहीँ दिल्ली बोर्ड के Daddy जी सेल्फी के साथसोशल मीडिया पर उछलते कूदते नज़र आते और बेचारे UP बोर्ड के छात्र अपनी गलती नहीं समझपाते कि आखिर सवालों के तो सारे जवाब सही सही लिखे थे फिर ऐसा क्या हो गया की80-90 प्रतिशत में ही सफर थम गया, घरवालों का मूड ऑफ हो गया.

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आखिर क्या कसूर है, UP बोर्ड के तमाम परीक्षार्थियों का जिन्हेंमूल्यांकन की खामियों का यह खामियाजा भुगतना पड़ता है, दिल्ली बोर्ड के जिन छात्र छात्राओंको शत प्रतिशत मार्क्स मिले हैं ऐसे होनहार, प्रतिभावान छात्रों को बधाई देने के साथ-साथदूसरे छात्रों को सीखने के लिए और यह देखने के लिए कि आखिर सवालों के जवाब किस तरहसे लिखे जाते हैं कि शत-प्रतिशत मार्क्स मिलते हैं, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं को सार्वजनिककिया जाना चाहिए और पब्लिक डोमेन पर ऐसी उत्तर पुस्तिकाओं का उपलब्ध होना बहुत महत्वपूर्णहै. एक तरफ शत प्रतिशत प्राप्त उत्तर पुस्तिकाओं को देखकर UP बोर्ड के छात्रों को उत्तरपुस्तिका में सही प्रारूप में लिखने के तरीके को सीखने को मिलेगा वहीँ मूल्यांकन कीप्रणाली का भी अंतर दिखेगा, जिस तरह UP बोर्ड के मूल्यांकन में दो करोड़ 93 लाख कॉपियां21 दिनों में चेक की जाती है ये मूल्यांकन प्रणाली पर एक बड़ा सवाल है जिस पर आजतक कोईचिंतन नहीं किया गया और मूल्यांकन की खामियों के चलते 99 प्रतिशत या शत प्रतिशत परिणामन आने का UP बोर्ड के होनहार छात्रों के सर पर ही ठीकरा फोड़ दिया जाता है जो अनुचितहै. सबका साथ सबका विकास की तर्ज़ पर दिल्ली बोर्ड के साथ साथ UP बोर्ड की मूल्यांकनकी स्थिति पर गंभीर चिंतन और बदलाव किया जाना बेहद ज़रूरी है क्योंकि मूल्यांकनकी खामियों का खामियाजा प्रदेश के होनहार, बुद्धिमान U.P. बोर्ड के छात्र आखिर कब तकभुगतेंगे।

DR. MOHD. KAMRAN
FREELANCE JOURNALIST
9335907080

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